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Balrampur; मानव वन्य जीव संघर्ष की घटनाओं का संज्ञान लेते हुए सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग बलरामपुर द्वारा सभी रेंजों में वन क्षेत्र से सटे गांवों एवं आसपास के क्षेत्रों में 24 घंटे गश्त और वन्य जीवों की नियमित ट्रैकिंग की जा रही है। बुधवार को भांभर रेंज के अंतर्गत ग्राम रेहरा, बनगंवा, कंचनपुर व गोडनी में प्रतिदिन प्रातः 6 बजे से 9 बजे तक लगभग 6 से 7 किमी पैदल ट्रैकिंग की गई। हालांकि ट्रैकिंग के दौरान तेंदुए के पगमार्क की पुष्टि नहीं हो सकी।
भांभर रेंज के फील्ड स्टाफ द्वारा वन क्षेत्र के समीपवर्ती गांवों बेलभरिया, पिपरा, सडवा एवं परसरामपुर में गश्त पेट्रोलिंग कर ग्रामीणों से जानकारी ली गई, लेकिन कहीं भी तेंदुए की उपस्थिति की सूचना प्राप्त नहीं हुई। वहीं तेंदुए की पुष्टि एवं उपस्थिति हेतु जगह जगह लगाए गए ट्रैपिंग कैमरों की निगरानी की जा रही है और उनमें लगे मेमोरी कार्ड को खंगाला जा रहा है ताकि किसी भी क्षेत्र में तेंदुए की उपस्थिति कैद हो सके।
उप प्रभागीय वनाधिकारी तुलसीपुर द्वारा भांभर रेंज के कंचनपुर एवं रेहरा गांव में गोष्ठी का आयोजन कर जनमानस को तेंदुए से बचाव के उपाय बताते हुए वन क्षेत्र में प्रवेश न करने का अनुरोध किया गया। इसी क्रम में नदी नालों के किनारे वन्य जीवों की उपस्थिति को दृष्टिगत रखते हुए बरहवा एवं बनकटवा रेंज के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा निर्धारित रूट मैप के अनुसार संवेदनशील नालों के किनारे गश्त कर ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है।
बनकटवा रेंज के अंतर्गत तेंदुए के रेस्क्यू हेतु उच्च स्तर से प्राप्त अनुमति के बाद पिंजड़ा भी स्थापित कर दिया गया है ताकि आवश्यकता पड़ने पर तेंदुए को रेस्क्यू कर अन्यत्र छोड़ा जा सके। वर्तमान में प्रभाग के संवेदनशील रेंजों के निकटवर्ती गांवों में बैनर, पोस्टर एवं ई रिक्शा व लाउडस्पीकर के माध्यम से जनमानस को 'क्या करें क्या न करें' के तहत जागरूक किया जा रहा है। साथ ही अति संवेदनशील गांवों व क्षेत्रों में ड्रोन के माध्यम से लगातार निगरानी रखी जा रही है।
इसके अतिरिक्त रेंज स्तर पर क्षेत्रीय वन अधिकारी एवं स्टाफ द्वारा स्थानीय स्कूलों व कालेजों में अध्यापकों एवं छात्र छात्राओं को वन्य जीव से बचाव के बारे में जानकारी दी जा रही है। सांयकाल अंधेरा होने पर पूर्व की भांति वन क्षेत्र के निकटवर्ती एवं संवेदनशील ग्रामों में पटाखे भी फोड़े जा रहे हैं ताकि हिंसक वन्य जीव आवाज के भय से आबादी वाले क्षेत्र की ओर अग्रसर न हो सकें।
घटना स्थल एवं मानव वन्य जीव संघर्ष की दृष्टि से संवेदनशील अन्य ग्रामों में कैमरा ट्रैप स्थापित कर वन्य जीवों के मूवमेंट पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। ग्राम प्रधानों से समन्वय स्थापित कर नियमित चौपाल व गोष्ठी आयोजित करते हुए जनमानस को वन क्षेत्र में महुआ एकत्र करने, पालतू जानवरों को चराने व लकड़ी बीनने हेतु जाने से मना किया जा रहा है। साथ ही वन्य जीवों से बचाव के उपाय बताकर स्थानीय ग्रामीणों को जागरूक करने की कार्यवाही लगातार की जा रही है।
Location : Balrampur
Published : 15 April 2026, 8:17 PM IST
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