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बलरामपुर में वकीलों के साथ बड़ा धोखा (Img: Google)
Balrampur : उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जनपद में अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए संचालित अधिवक्ता आपदा राहत कोष समिति के खाते से जाली हस्ताक्षर और फर्जी मोहरों के जरिए लाखों रुपये का गबन करने का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस संगठित धोखाधड़ी के खुलासे के बाद कोतवाली नगर पुलिस ने समिति के पूर्व संयोजक व अधिवक्ता शशांक कुमार त्रिपाठी समेत 11 नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। यह पूरी कार्रवाई समिति के अध्यक्ष कमलेश्वर सिंह की लिखित तहरीर पर की गई है, जिन्होंने बैंक स्टेटमेंट देखने के बाद इस बड़े वित्तीय अपराध का पर्दाफाश किया।
मिली जानकारी के अनुसार, कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और आपदा राहत समिति के मुखिया कमलेश्वर सिंह ने पुलिस को बताया कि इस बैंक खाते का संचालन निर्वाचित पदाधिकारियों द्वारा किया जाता है। समिति के तत्कालीन संयोजक शशांक कुमार त्रिपाठी को उनके पद से पिछले साल 12 दिसंबर 2025 को आम सभा की बैठक में हटा दिया गया था।
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पद से मुक्त होने के बावजूद आरोपी शशांक कुमार त्रिपाठी ने बीते 16 अप्रैल और 3 जून 2026 को बैंक जाकर चालाकी से राहत समिति की दो अलग-अलग चेकबुक से कुल 50 ब्लैंक चेक हासिल कर लिए। इसके बाद उन्होंने वर्तमान पदाधिकारियों को बिना कोई भनक लगे, इन चेकों को अपने पास छिपाकर रख लिया।
खाते से रकम साफ करने के लिए एक गहरा आपराधिक षड्यंत्र रचा गया। आरोपी ने राम चरित्र, राम सूरत, देवी प्रसाद, अवधराम, लक्ष्मन, अक्षय कुमार, अम्बुज, शिवशंकर, रामसेवक और दुर्गा प्रसाद नामक व्यक्तियों के साथ मिलकर एक संगठित गिरोह की तरह काम किया। इन सभी के नामों पर अलग-अलग रकम के चेक काटे गए, जिन पर समिति के अधिकृत पदाधिकारियों के फर्जी और कूट रचित हस्ताक्षर बनाए गए और फर्जी मोहरों का इस्तेमाल किया गया। इस तरह असली चेक की तरह पेश कर आरोपियों ने बैंक से कुल 8,75,000 रुपये की मोटी रकम पार कर दी।
इस बड़े गबन का पता तब चला जब बीते 8 जून को समिति के अध्यक्ष ने बैंक से खाते का स्टेटमेंट निकलवाया। इतनी बड़ी रकम गायब देख उनके होश उड़ गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए 10 जून को आपदा राहत समिति की एक आपातकालीन आम सभा बुलाई गई, जिसमें खाते का संचालन करने वाले अन्य पदाधिकारियों अजय बहादुर सिंह, अनिल कुमार शुक्ला और रमेशचन्द्र त्रिपाठी से चेकों पर मौजूद हस्ताक्षरों के बारे में पूछताछ की गई। सभी पदाधिकारियों ने उन चेकों पर अपने हस्ताक्षर होने से साफ इनकार कर दिया और बताया कि ये दस्तखत पूरी तरह फर्जी हैं।
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संस्था के धन को निजी स्वार्थ के लिए कूट रचित दस्तावेज तैयार कर हड़पने के इस मामले में पुलिस ने त्वरित एक्शन लिया है। कोतवाली नगर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच उपनिरीक्षक संतोष कुमार को सौंप दी है। पुलिस अब इस संगठित गिरोह के सभी सदस्यों की तलाश और गबन की गई रकम की बरामदगी के लिए कानूनी शिकंजा कसने में जुट गई है।
Location : Balrampur
Published : 13 June 2026, 1:10 PM IST