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प्रतीकात्मक तस्वीर (Img: Google)
Lucknow: उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए जून का महीना राहत लेकर आया है। बिजली बिलों को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चा के बीच अब पावर कॉरपोरेशन ने उपभोक्ताओं को बड़ा फायदा देने का फैसला किया है। राज्य के लाखों परिवारों और व्यवसायिक उपभोक्ताओं को उनकी जमा सिक्योरिटी राशि पर मिलने वाले ब्याज का लाभ जून के बिजली बिल में समायोजित किया जा रहा है। इससे कई उपभोक्ताओं का बिल कम हो सकता है और उन्हें सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।
हालांकि इस राहत के साथ बिजली बिलों में लगाए गए अतिरिक्त अधिभार शुल्क को लेकर भी नया मोड़ सामने आया है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
विद्युत अधिनियम-2003 और विद्युत वितरण संहिता-2005 के तहत बिजली उपभोक्ताओं द्वारा जमा कराई गई सिक्योरिटी राशि पर हर साल ब्याज दिया जाता है। यह ब्याज उस बैंक दर के आधार पर तय किया जाता है जो एक अप्रैल को लागू रहती है। वर्ष 2025-26 के लिए एक अप्रैल 2025 को बैंक दर 6.50 प्रतिशत निर्धारित थी। इसी आधार पर पावर कॉरपोरेशन ने उपभोक्ताओं की जमा जमानत राशि पर 6.50 फीसदी की दर से ब्याज देने का निर्णय लिया है। यह राशि सीधे जून के बिजली बिल में समायोजित की जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं को अलग से कोई प्रक्रिया पूरी नहीं करनी होगी।
प्रदेश में करीब 3 करोड़ 73 लाख बिजली उपभोक्ता हैं, जिन्हें इस फैसले का फायदा मिलेगा। आंकड़ों के अनुसार बिजली उपभोक्ताओं की कुल जमा सिक्योरिटी राशि लगभग 4,616 करोड़ रुपये है। इस आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि करीब 300 करोड़ रुपये की राशि ब्याज के रूप में उपभोक्ताओं को वापस मिलेगी। यह रकम अलग-अलग उपभोक्ताओं के लिए उनकी जमा सिक्योरिटी राशि के अनुसार भिन्न हो सकती है।
कई उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल है कि अगर उन्होंने जून का बिजली बिल पहले ही जमा कर दिया है तो क्या उन्हें इस ब्याज का लाभ मिलेगा?
इस संबंध में स्पष्ट किया गया है कि जिन उपभोक्ताओं के बिल में जून माह में ब्याज राशि का समायोजन नहीं हो पाया है, उन्हें जुलाई के बिल में इसका लाभ दिया जाएगा। यानी किसी भी पात्र उपभोक्ता का ब्याज नहीं रुकेगा और अगली बिलिंग प्रक्रिया में उसे समायोजित कर दिया जाएगा।
दरअसल, राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। परिषद का कहना था कि करोड़ों उपभोक्ताओं को उनकी जमा सिक्योरिटी राशि पर मिलने वाला वार्षिक ब्याज समय पर नहीं दिया जा रहा है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उपभोक्ताओं का पैसा वर्षों से बिजली विभाग के पास जमा रहता है, इसलिए उस पर मिलने वाला ब्याज समय पर उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए। उन्होंने सभी उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने बिजली बिल का मिलान अवश्य करें और यह जांचें कि ब्याज की राशि उनके बिल में समायोजित हुई है या नहीं।
जून के बिजली बिलों में लगाए गए 10 प्रतिशत अतिरिक्त अधिभार शुल्क को लेकर भी राहत की संभावना बनी हुई है। इस शुल्क को लेकर कई उपभोक्ताओं और संगठनों ने आपत्ति जताई थी। पावर कॉरपोरेशन का कहना है कि यह राशि पूर्व भुगतान और ईंधन अधिभार शुल्क के आधार पर जोड़ी गई है। हालांकि नियामक आयोग ने इस मामले में विस्तृत आंकड़े तलब किए हैं और इसकी समीक्षा कर रहा है।
अगर आयोग समय पर फैसला देता है तो जुलाई से लागू होने वाले अधिभार शुल्क की नई गणना की जा सकती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को अतिरिक्त वसूली की रकम वापस मिलने या भविष्य के बिलों में समायोजित होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि उपभोक्ता जून और जुलाई के बिजली बिलों को ध्यान से जांचें। बिल में सिक्योरिटी राशि पर मिलने वाले ब्याज और अन्य समायोजन का मिलान करना जरूरी है। अगर किसी उपभोक्ता को ब्याज का लाभ नहीं मिला है तो वह संबंधित बिजली कार्यालय या उपभोक्ता सेवा केंद्र में जानकारी प्राप्त कर सकता है। फिलहाल, 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के लिए यह फैसला बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
Location : Lucknow
Published : 13 June 2026, 12:16 PM IST