बदायूं में कीर्तन फेरी रोकने पर मचा बवाल, पुलिस ने किया लाठीचार्ज; पढ़ें पूरा मामला

बदायूं के व्योर कस्माबाद में माघ माह की कीर्तन फेरी रोकने पर ग्रामीण आक्रोशित हुए। पुलिस ने लाठीचार्ज किया, 8-10 लोग घायल। ग्रामीण पुराने मार्ग से फेरी निकालने की मांग कर रहे हैं।

Updated : 16 January 2026, 4:09 PM IST
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Badaun: इस्लामनगर थाना क्षेत्र के गांव व्योर कस्माबाद में माघ माह में निकलने वाली पारंपरिक कीर्तन फेरी को रोकने पर ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। फेरी को रोकने के पीछे पुलिस ने मस्जिद के रास्ते में होने का कारण बताया, जबकि ग्रामीण इसका विरोध कर रहे हैं और पुरानी परंपरा के अनुसार फेरी गांव के अंदर से निकलने की मांग कर रहे हैं।

फेरी रोकने के बाद बढ़ा लोगों का आक्रोश

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2012 तक यह कीर्तन फेरी गांव के मुख्य मार्ग से ही निकलती थी। उस समय सड़क की स्थिति खराब होने के कारण प्रशासन ने फेरी को गांव के बाहर से निकालने का निर्णय लिया था। अब सड़क की मरम्मत पूरी हो चुकी है, और ग्रामीणों का कहना है कि पुराने मार्ग से फेरी निकलने में कोई बाधा नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुराने मार्ग पर गांव के सभी मंदिर स्थित हैं और यही मार्ग फेरी के लिए सबसे उपयुक्त है।

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फेरी को रोकने की सूचना पर पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुँचकर स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश की। हालांकि, जब ग्रामीणों ने पुराने मार्ग से फेरी निकालने की जिद दिखाई, तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए लाठीचार्ज किया। इस दौरान 8 से 10 लोग घायल हो गए, जिनमें महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल हैं। घायलों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।

माघ माह की परंपरा पर विवाद

घटना के बाद ग्रामीणों और पुलिस के बीच तीखी बहस भी हुई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिना किसी संवाद के फेरी को रोक दिया, जिससे उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची। वहीं, पुलिस का कहना है कि मस्जिद के रास्ते से फेरी निकालना कानून और व्यवस्था के लिए खतरा हो सकता था, इसलिए उन्हें रोकना पड़ा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कीर्तन फेरी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गांव की सांस्कृतिक पहचान भी है। हर साल माघ माह में यह फेरी निकलती है और इसके माध्यम से गांव के लोग अपने धार्मिक उत्सवों में भाग लेते हैं। फेरी रोकने से न केवल धार्मिक गतिविधियों पर असर पड़ा है, बल्कि ग्रामीणों के बीच असंतोष भी बढ़ा है।

पुलिस और ग्रामीण आमने-सामने

साथ ही ग्रामीणों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि वे पुरानी परंपरा को ध्यान में रखते हुए फेरी को पुराने मार्ग से निकलने की अनुमति दें। उन्होंने कहा कि सड़क की मरम्मत पूरी हो चुकी है और कोई भी सुरक्षा खतरा नहीं है। प्रशासन को चाहिए कि वे गांव के धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान करें और समाधान निकालें।

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ग्रामीणों और पुलिस के बीच बातचीत के बाद ही यह तय होगा कि भविष्य में कीर्तन फेरी किस मार्ग से निकाली जाएगी। प्रशासन ने कहा है कि वह दोनों पक्षों की बात सुनकर निर्णय लेगा, ताकि धार्मिक परंपराओं का सम्मान भी हो और कानून-व्यवस्था का पालन भी सुनिश्चित हो।

Location : 
  • Badaun

Published : 
  • 16 January 2026, 4:09 PM IST

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