Ayodhya News: राम मंदिर चढ़ावा केस में बड़ा ट्विस्ट, कथित डायरी के पन्नों में दर्ज दावों ने अयोध्या में बढ़ाई हलचल

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर पूर्व महासचिव चंपत राय की बताई जा रही एक गोपनीय डायरी के सामने आने से मामला फिर चर्चा में है। डायरी में राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के बयानों, मंदिर की व्यवस्थाओं से उनकी दूरी और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल दर्ज होने का दावा किया गया है।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 23 August 2026, 10:39 AM IST
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Ayodhya: राम मंदिर चढ़ावा धनराशि चोरी मामले के बीच पूर्व महासचिव चंपत राय की ओर से लिखी गई बताई जा रही डायरी में कई महत्वपूर्ण घटनाओं का क्रमवार उल्लेख किया गया है। इसमें 18 जून से नृपेंद्र मिश्र द्वारा दिए गए टीवी साक्षात्कारों और उनके बयानों में कथित बदलाव को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

नृपेंद्र मिश्र ने दिल्ली में 18 जून से अलग-अलग टीवी चैनलों को इंटरव्यू देना शुरू किया था। दावा है कि चार दिनों के दौरान उन्होंने करीब 14 चैनलों से बातचीत की। शुरुआती बातचीत में उनकी जिम्मेदारी मंदिर के निर्माण कार्य तक सीमित बताई गई, लेकिन बाद के बयानों में बदलाव आने का उल्लेख डायरी में किया गया है।

'डकैती' शब्द के इस्तेमाल पर भी सवाल

डायरी में नृपेंद्र मिश्र के एक बयान का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने चढ़ावा चोरी के लिए कथित तौर पर 'डकैती' शब्द का इस्तेमाल किया था। चंपत राय की ओर से डायरी में लिखा गया बताया गया है कि इस तरह की भाषा से समाज में गलत संदेश गया। इसके बाद 23 जून से नृपेंद्र मिश्र के सार्वजनिक बयान अचानक बंद होने का भी जिक्र किया गया है। डायरी में इस बदलाव के कारण को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

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संतों ने भी उठाए थे सवाल

डायरी में दावा किया गया है कि चढ़ावा चोरी की घटना के कुछ दिन बाद कुछ संतों ने चंपत राय से नृपेंद्र मिश्र की भूमिका को लेकर सवाल किया था। उनसे पूछा गया कि क्या नृपेंद्र मिश्र इस पूरे मामले में खलनायक की भूमिका निभा रहे हैं। चंपत राय ने कथित तौर पर लिखा कि उस समय उनके पास इस सवाल का कोई स्पष्ट जवाब नहीं था। हालांकि, डायरी में दर्ज बातों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।

मंदिर की व्यवस्थाओं से दूरी का दावा

डायरी के अनुसार, घटना से करीब छह महीने पहले से नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर की व्यवस्थाओं से खुद को अलग करना शुरू कर दिया था। पहले निर्माण कार्यों के साथ व्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर भी दोनों के बीच बैठक में चर्चा होती थी। किसी मुद्दे पर मतभेद होने की स्थिति में बातचीत के जरिए सहमति बनाने का प्रयास किया जाता था। दावा है कि बाद में नृपेंद्र मिश्र ने व्यवस्थाओं से जुड़े मामलों को ट्रस्ट के अधिकार क्षेत्र का विषय बताते हुए उनसे दूरी बनानी शुरू कर दी। डायरी में इसे ट्रस्ट और निर्माण समिति के बीच बढ़ते संस्थागत मतभेद से जोड़कर देखा गया है।

भुगतान में देरी से निर्माण कार्य प्रभावित

डायरी में राम मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों की धीमी गति का भी उल्लेख किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि कई निर्माण एजेंसियों के भुगतान लंबित होने के कारण काम की रफ्तार प्रभावित हुई है। सबसे महत्वपूर्ण बाउंड्रीवाल के निर्माण का काम करीब दो महीने में 10 प्रतिशत की प्रगति भी दर्ज नहीं कर पाने की बात कही गई है। ऑडिटोरियम समेत अन्य परियोजनाओं की गति पर भी भुगतान में देरी का असर पड़ने का दावा किया गया है।

एजेंसियों पर बढ़ा आर्थिक दबाव

मंदिर परिसर और उससे जुड़े निर्माण कार्यों में कई छोटी-बड़ी एजेंसियां काम कर रही हैं। भुगतान समय पर नहीं होने के कारण कुछ एजेंसियों को अपनी कार्यशील पूंजी से कर्मचारियों का वेतन और दूसरे खर्च पूरे करने पड़ रहे हैं।

इसका असर निर्माण सामग्री की खरीद और आपूर्ति पर भी पड़ने की बात कही गई है। पुराने ठेकेदारों और कार्यदायी संस्थाओं के काम, अनुबंध और दावों की दोबारा समीक्षा को भी भुगतान प्रक्रिया में देरी की एक वजह बताया गया है।

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कई एजेंसियों के कर्मचारियों का वेतन लंबित

सफाई, सीवरेज, ड्रेनेज और दूसरी व्यवस्थाओं में करीब एक दर्जन एजेंसियां काम कर रही हैं। दावा है कि बीवीजी के कर्मचारियों का अप्रैल से जुलाई तक का वेतन बकाया है। वहीं यूनी पॉइंट और जिलाजीत एजेंसियों के कर्मचारियों का मई से जुलाई तक का वेतन लंबित बताया गया है। भुगतान में देरी से इन एजेंसियों पर आर्थिक दबाव बढ़ने की बात कही गई है। यह स्थिति चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे के बाद लागू हुई नई व्यवस्था के बीच सामने आई है।

आठ आरोपियों की न्यायिक अभिरक्षा बढ़ी

राम मंदिर चढ़ावा धनराशि चोरी मामले में जेल में बंद सभी आठ आरोपियों की न्यायिक अभिरक्षा पांच सितंबर तक बढ़ा दी गई है। शनिवार को आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट में पेश किया गया। अभियोजन पक्ष की मांग पर विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट रजत वर्मा ने न्यायिक अभिरक्षा बढ़ाने का आदेश दिया।

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आरोपी के बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज दाखिल

मामले में आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के पेंशन बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज भी अदालत में दाखिल किए गए। लीगल एड डिफेंस कौंसिल के डिप्टी चीफ कुलशेखर सिंह ने बैंक की सत्यापन रिपोर्ट समेत कुछ अन्य दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए।

अदालत ने अभियोजन पक्ष को 25 अगस्त से पहले इन दस्तावेजों पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। मामले में अगला आदेश 25 अगस्त को आने की संभावना है। चढ़ावा चोरी मामले की जांच और अदालत की कार्यवाही आगे बढ़ने के साथ अब डायरी में दर्ज दावों और मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े सवालों पर भी नजर बनी हुई है।

Location :  Ayodhya

Published :  23 August 2026, 10:39 AM IST

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