“राम मंदिर में हो रहे भ्रष्टाचार की जानकारी मैंने पहले ही चंपत राय को दे दी थी”… अब किसने किया बड़ा दावा?

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर रिटायर्ड इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने फर्जीवाड़ा, बिलिंग गड़बड़ी और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि शिकायत करने के बाद उन्हें कार्य से हटा दिया गया। उन्होंने एसआईटी के सामने बयान देने और सुरक्षा की मांग की है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 20 June 2026, 8:43 AM IST
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Ayodhya: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कार्य को लेकर नए विवाद ने तूल पकड़ लिया है। निर्माण कार्य से जुड़े रहे रिटायर्ड इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने गंभीर अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि जब उन्होंने कथित फर्जीवाड़े की जानकारी सामने रखी तो उन्हें परियोजना से हटा दिया गया।

शुरुआती जिम्मेदारी और दावे

दीनानाथ वर्मा के अनुसार, उन्हें निर्माण कार्य के शुरुआती चरण में इंजीनियरिंग सहयोग के लिए जोड़ा गया था। इस दौरान उन्होंने मिट्टी हटाने और अन्य निर्माण कार्यों में करोड़ों रुपये के टेंडर और भुगतान प्रक्रिया में अनियमितताओं का दावा किया है।

बिलिंग और भुगतान में गड़बड़ी के आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्कचार्ज मजदूरों को फर्जी तरीके से दर्शाकर बिल प्रस्तुत किए जा रहे थे, जिससे एक ही काम के लिए दोहरा भुगतान हो रहा था। एल्यूमीनियम कार्य के बिलों में भी निर्धारित राशि से लगभग डेढ़ गुना अधिक भुगतान का दावा सामने आया है।

कमीशनखोरी का आरोप

वर्मा का कहना है कि जब उन्होंने ठेकेदार से सवाल किया तो उन्हें कथित रूप से बताया गया कि 40 प्रतिशत कमीशन की व्यवस्था है। उन्होंने यह जानकारी संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पद से हटाए जाने का दावा

इंजीनियर का आरोप है कि शिकायतों के बाद उन्हें निर्माण कार्य से हटाकर चढ़ावा राशि की गिनती की जिम्मेदारी दी गई। बाद में उन्हें अयोध्या छोड़कर लौटने की स्थिति तक पहुंचा दिया गया।

जांच और पूछताछ की स्थिति

मामले में जांच प्रक्रिया जारी है और कई लोगों से पूछताछ की जा रही है। दान, बिलिंग और निर्माण व्यवस्था से जुड़े दस्तावेजों की जांच और वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जा रही है। प्रारंभिक रिपोर्ट जल्द पेश किए जाने की तैयारी है।

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पारदर्शिता और निगरानी पर सवाल

यह मामला बड़े धार्मिक निर्माण कार्यों में पारदर्शिता, ऑडिट सिस्टम और निगरानी व्यवस्था की मजबूती पर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे प्रोजेक्ट्स में स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य होना चाहिए ताकि विवाद और आरोपों की गुंजाइश कम हो सके।

Location :  Ayodhya

Published :  20 June 2026, 8:43 AM IST

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