गुमनाम भक्त ने अयोध्या को दिया दिव्य उपहार, 30 करोड़ की प्रतिमा कर्नाटक से पहुंची राम मंदिर

अयोध्या राम मंदिर परिसर में कर्नाटक के गुमनाम भक्त द्वारा दान की गई 25–30 करोड़ की रत्न-जड़ित भव्य प्रतिमा की स्थापना की तैयारी, अंगद टीला पर प्रतिष्ठा की संभावना।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 25 December 2025, 4:01 AM IST
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Ayodhya: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर जल्द ही एक और दिव्य और ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने जा रहा है। रामलला मंदिर कैंपस में अत्यंत भव्य, सोने की आभा से दमकती और बहुमूल्य रत्नों से जड़ी एक विशाल प्रतिमा की स्थापना की तैयारी चल रही है। यह प्रतिमा न केवल अपनी भव्यता बल्कि आध्यात्मिक गरिमा के कारण भी विशेष महत्व रखती है।

कर्नाटक के गुमनाम भक्त का अनोखा दान

इस बहुमूल्य प्रतिमा को कर्नाटक के एक गुमनाम श्रद्धालु द्वारा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को दान किया गया है। मंगलवार की शाम प्रतिमा को विशेष सुरक्षा और सावधानी के साथ कर्नाटक से अयोध्या लाया गया। ट्रस्ट का कहना है कि दानदाता की पहचान फिलहाल सामने नहीं आई है और भक्त ने स्वयं को गुप्त रखने की इच्छा जताई है।

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10 फीट ऊंची, रत्नों से जड़ी भव्य प्रतिमा

यह प्रतिमा करीब 10 फीट ऊंची और 8 फीट चौड़ी है। इसमें सोने की चमक के साथ हीरा, पन्ना, नीलम सहित कई बहुमूल्य रत्न जड़े हुए हैं। अनुमानित रूप से इसकी कीमत 25 से 30 करोड़ रुपये बताई जा रही है। प्रतिमा का निर्माण दक्षिण भारत की पारंपरिक और प्रसिद्ध शिल्पकला शैली में किया गया है।

वजन और धातु की जांच जारी

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि प्रतिमा का वजन कराया जा रहा है। अनुमान है कि इसका वजन लगभग 5 क्विंटल हो सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि प्रतिमा किस धातु से निर्मित है। जांच पूरी होने के बाद प्रतिमा से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

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अंगद टीला पर स्थापना का प्रस्ताव

सूत्रों के अनुसार, इस प्रतिमा को संत तुलसीदास मंदिर के समीप स्थित अंगद टीला पर स्थापित किए जाने पर विचार किया जा रहा है। स्थापना से पूर्व प्रतिमा का भव्य अनावरण किया जाएगा, जिसके बाद वैदिक विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा समारोह आयोजित होगा। इस समारोह में देशभर से संत-महंतों और धर्माचार्यों को आमंत्रित किया जाएगा।

1,750 किलोमीटर का सुरक्षित सफर

कर्नाटक से अयोध्या की दूरी लगभग 1,750 किलोमीटर है। इस प्रतिमा को विशेष रूप से तैयार की गई वैन के माध्यम से लाया गया। यात्रा में करीब 5 से 6 दिन का समय लगा। मंगलवार शाम करीब 3:30 बजे प्रतिमा राम मंदिर परिसर पहुंची, जहां परिसर के भीतर ही इसे सावधानीपूर्वक खोला गया।

तंजावुर के कारीगरों की अद्भुत कारीगरी

सूत्रों के मुताबिक, इस प्रतिमा को कर्नाटक के कुछ श्रद्धालुओं ने संयुक्त रूप से तैयार कराया है। इसके निर्माण में तमिलनाडु के तंजावुर के कुशल और अनुभवी कारीगरों की अहम भूमिका रही है। उनकी कलात्मक दक्षता ने प्रतिमा को अत्यंत जीवंत और आकर्षक स्वरूप प्रदान किया है।

रामलला की नवनिर्मित मूर्ति की हूबहू प्रतिकृति

यह प्रतिमा राम जन्मभूमि में प्रतिष्ठापित रामलला की नवनिर्मित मूर्ति की हूबहू प्रतिकृति है। सोने और बहुमूल्य रत्नों के प्रयोग से इसकी भव्यता और आध्यात्मिक प्रभाव और भी बढ़ गया है।

29 दिसंबर से मनाई जाएगी प्रतिष्ठा द्वादशी

रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को हुई थी। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष इसकी दूसरी वर्षगांठ 31 दिसंबर को मनाई जाएगी, जिसे ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ नाम दिया गया है। अंगद टीला परिसर में इसके लिए भूमि पूजन किया जा चुका है।

2 जनवरी तक चलेंगे धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन

अंगद टीला परिसर में 29 दिसंबर 2025 से 2 जनवरी 2026 तक विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। श्रीराम अभिषेक, श्रृंगार, भोग एवं आरती जैसे अनुष्ठान प्रतिदिन सुबह 9:30 बजे से दोपहर आरती तक संपन्न होंगे।

Location : 
  • Ayodhya

Published : 
  • 25 December 2025, 4:01 AM IST

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