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जिले के सिकरिगंज थाना क्षेत्र के ग्राम ददौरा में शोक की लहर दौड़ गई है। मात्र 23 वर्षीय सीआरपीएफ जवान प्रभुनाथ यादव जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से मुकाबला करते हुए शहीद हो गए। भारत मां के इस वीर सपूत की शहादत ने पूरे गांव, पढ़ें पूरी खबर
गोरखपुर: जिले के सिकरिगंज थाना क्षेत्र के ग्राम ददौरा में शोक की लहर दौड़ गई है। मात्र 23 वर्षीय सीआरपीएफ जवान प्रभुनाथ यादव जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से मुकाबला करते हुए शहीद हो गए। भारत मां के इस वीर सपूत की शहादत ने पूरे गांव, आसपास के क्षेत्रों और गोरखपुर जनपद को गमगीन कर दिया है।
क्या है पूरी खबर?
प्रभुनाथ यादव का जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। बचपन से ही देशभक्ति की भावना उनके दिल में बसी थी। स्कूल-कॉलेज के दिनों में वे वर्दीधारी जवानों को देखकर सपने संजोते थे कि एक दिन वे भी राष्ट्र की रक्षा में योगदान देंगे। कड़ी मेहनत और लगन से उन्होंने सीआरपीएफ में चयनित होकर अपनी इस इच्छा को साकार किया।
आतंकियों ने घात लगाकर हमला
जम्मू-कश्मीर के कठिन और खतरनाक इलाकों में तैनात होकर वे आतंक के खिलाफ डटकर लड़ रहे थे। हाल ही में एक ऑपरेशन के दौरान आतंकियों ने घात लगाकर हमला किया। इस मुठभेड़ में प्रभुनाथ यादव बहादुरी से लड़े और अंततः शहीद हो गए। उनका बलिदान देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए एक अमर उदाहरण है। खबर जैसे ही ददौरा पहुंची, गांव सन्न रह गया। माता-पिता, भाई-बहन, रिश्तेदार और पड़ोसी सभी की आंखें भर आईं। लोग कह रहे हैं कि प्रभुनाथ जैसे जवान ही असली नायक होते हैं, जो अपनी जान देकर हमें सुरक्षित रखते हैं।
गांव में शोक का माहौल
पूरे गांव में शोक का माहौल छाया है। युवा उनकी तस्वीरों के सामने दीप प्रज्वलित कर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। नारे गूंज रहे हैं-"शहीद अमर रहें!", "भारत माता की जय!"। बुजुर्गों का कहना है कि प्रभुनाथ का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा।
अंतिम संस्कार की तैयारियां
शहीद प्रभुनाथ यादव का पार्थिव शरीर 11 फरवरी को उनके पैतृक गांव ददौरा पहुंचने वाला है। प्रशासन द्वारा पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की तैयारियां तेज हो गई हैं। सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी, स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधि और सुरक्षा बलों के जवान उनके पार्थिव शरीर को अंतिम सलामी देंगे। पूरा गोरखपुर और उत्तर प्रदेश इस वीर पुत्र को नमन करने के लिए तैयार है।
कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि सीमाओं पर तैनात हमारे जवान कितने कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी निभाते हैं। प्रभुनाथ जैसे हजारों जवान रोज अपनी जान जोखिम में डालकर हमें चैन की नींद सोने देते हैं। उनका बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाएगा।