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पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर से जुड़े मामले में कानूनी मोर्चे पर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। यूपी के छह वरिष्ठ पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर अदालत में परिवाद दाखिल किया गया है।
पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर (Img: Google)
Lucknow: उत्तर प्रदेश के पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर से जुड़े प्रकरण में एक बार फिर बड़ा कानूनी मोड़ आया है। इस मामले को लेकर एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश, लखनऊ पुलिस कमिश्नर अमरेन्द्र सिंह सेंगर और प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद सहित कुल छह वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर अदालत में परिवाद दाखिल किया गया है। इस कदम के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
दाखिल परिवाद में आरोप लगाया गया है कि पूरे घटनाक्रम में कई वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों की साझा भूमिका रही, इसके बावजूद संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। प्रार्थना पत्र में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 190, 248, 115(2)/117, 61(2), 109/110, 351(2) और 356/357 के तहत एफआईआर पंजीकृत करने की मांग की गई है। याचिका में इसे गंभीर अधिकार उल्लंघन बताया गया है।
वादकर्ता का कहना है कि इस प्रकरण को लेकर थाना स्तर से लेकर पुलिस के उच्चाधिकारियों तक लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन किसी भी स्तर पर मामला दर्ज नहीं किया गया। इसी कारण न्यायिक हस्तक्षेप का सहारा लेना पड़ा। याचिका में यह भी कहा गया है कि अगर अब भी कार्रवाई नहीं होती है तो पुलिस व्यवस्था से न्याय की उम्मीद समाप्त हो जाएगी।
यह परिवाद अमिताभ ठाकुर की संस्था ‘आज़ाद अधिकार सेना’ के पदाधिकारी सिंहासन चौहान द्वारा दाखिल किया गया है। वाद में अवैध गिरफ्तारी, मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना और हत्या की साजिश जैसे गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया है। अदालत में शुक्रवार को सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमिताभ ठाकुर की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर भी चिंताएं सामने आई हैं। बताया गया है कि उन्हें गोरखपुर से गंभीर हालत में लखनऊ लाया गया। इससे पहले भी उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर आशंका जताई थी। हालांकि, प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।