UP Politics: अखिलेश यादव को पूड़ी खिलाना महिला को भारी पड़ा उसके पिता को सुपरवाइजर से बना दिया सफाई कर्मी

एक भंडारे में हुई मुलाकात अब बड़ा राजनीतिक विवाद बन गई है। आरोप है कि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को पूड़ी खिलाने की कीमत एक परिवार को नौकरी में डिमोशन के रूप में चुकानी पड़ी। इस पूरे मामले ने राजनीति, प्रशासन और सत्ता के इस्तेमाल पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 7 May 2026, 11:31 AM IST
google-preferred

Lucknow: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को एक भंडारे में पूड़ी खिलाने का मामला अब बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गया है। आरोप है कि भंडारे का आयोजन करने वाली अंजलि मैसी के पिता उमेश कुमार को नौकरी में डिमोट कर सुपरवाइजर से सफाई कर्मचारी बना दिया गया। इस घटना के सामने आने के बाद अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी और उत्तर प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा।

सपा प्रमुख ने इस कार्रवाई को “निकृष्ट राजनीति” बताते हुए कहा कि ऐसा व्यवहार तो अंग्रेजों ने भी नहीं किया था। वहीं प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई राजनीतिक कारणों से नहीं, बल्कि सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन की वजह से की गई है।

क्या है पूरा मामला?

 

दरअसल, 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर एक भंडारे का आयोजन किया गया था। यह कार्यक्रम कैंटोनमेंट बोर्ड के कर्मचारी उमेश कुमार ने आयोजित किया था। बताया जाता है कि उमेश कुमार की बेटी अंजलि मैसी के बुलावे पर अखिलेश यादव ने आलू-पूरी खाई और लोगों से मुलाकात की।

इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। इसके कुछ समय बाद उमेश कुमार के डिमोशन की खबर सामने आई।

‘मेरे पिता 100 नौकरियां कुर्बान कर देंगे’

इस विवाद के बीच अंजलि मैसी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भावुक बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनके पिता अखिलेश यादव के सम्मान में “100 नौकरियां भी कुर्बान” कर सकते हैं। अंजलि ने आरोप लगाया कि उनके परिवार को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक सामान्य सामाजिक कार्यक्रम को राजनीतिक मुद्दा बना दिया गया।

Lucknow: अखिलेश यादव का बड़ा फैसला; सपा ने चुनावी रणनीति बनाने वाली एजेंसी I-PAC से खत्म किया कॉन्ट्रैक्ट

अखिलेश यादव ने BJP पर लगाया आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि वह पहले अंजलि मैसी को नहीं जानते थे। वह गुरुद्वारे में गए थे, जहां उनकी मुलाकात अंजलि से हुई और बगल में चल रहे भंडारे में वह शामिल हो गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद बीजेपी नेताओं के इशारे पर कार्रवाई की गई। सपा प्रमुख ने कहा कि वह इस मामले को उच्च अधिकारियों तक ले जाएंगे।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि भाजपा सरकार “पीडीए समाज” के लोगों के खिलाफ मानसिकता रखती है और यह कार्रवाई उसी सोच का हिस्सा है।

सपा ने खोली ईडी और बीजेपी की पोल, मिलीभगत का आरोप

‘अंग्रेजों ने भी इतनी निकृष्ट राजनीति नहीं की’

सपा प्रमुख ने अपने पोस्ट में लिखा कि सिर्फ इसलिए एक परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने बाबासाहेब अंबेडकर जयंती के दिन उन्हें भोजन कराया था। उन्होंने कहा कि “इतनी निकृष्ट राजनीति तो अंग्रेजों ने भी नहीं की थी।” अखिलेश यादव ने दावा किया कि इससे पहले भी उनके साथ चाय पीने वाले एक युवक को परेशान किया गया था।

प्रशासन ने क्या सफाई दी?

वहीं प्रशासन और कैंटोनमेंट बोर्ड के अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज किया है। अधिकारियों का कहना है कि उमेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई का कारण अखिलेश यादव को भोजन कराना नहीं है।
उनके मुताबिक उमेश कुमार ने वरिष्ठ अधिकारियों को सीधे निमंत्रण भेजा था और इसके लिए बोर्ड की अनुमति नहीं ली गई थी। इसे सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन माना गया, जिसके चलते विभागीय कार्रवाई की गई।

Location :  Lucknow

Published :  7 May 2026, 11:31 AM IST

Advertisement