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सपा के राष्ट्रीय प्रमुख अखिलेश यादव
Lucknow: समाजवादी पार्टी ने चुनाव आयोग और बीजेपी पर खुलेआम चुनावों में बड़ी धांधली करने का आरोप लगाया है। सपा ने विगत सालों में चुनाव में हुई डकैती का चिट्ठा भी खोला है। राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर वोट बैंक में असामान्य बदलाव और इतनी बड़ी गिरावट कैसे हुई। चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी बहस तेज हो गई है।
गौरतलब है कि विपक्षी दल बीजेपी और चुनाव आयोग पर चुनाव में गड़बड़ी, असामान्य बदलाव का आरोप लगा रहा है।
समाजवादी पार्टी ने कुंदरकी विधानसभा सीट पर वोट प्रतिशत के आंकड़ों का ग्राफ साझा किया। हालिया ग्राफ में 2012, 2017 और 2022 तक सपा का वोट शेयर मजबूत दिखता है, लेकिन 2024 उपचुनाव में अचानक बड़ा उलटफेर सामने आया है। जहां सपा का वोट गिरकर महज 12% रह गया, वहीं भाजपा 77% तक पहुंचती दिख रही है। इस असामान्य बदलाव को लेकर विपक्ष ने “वोट की डकैती” का आरोप लगाया है।
आंकड़ों से जाने कुंदरकी विधानसभा का असली हाल
रामपुर विधानसभा में सीट पर वोट प्रतिशत के आंकड़ों को लेकर गड़बड़झाला सामने आया। पिछले चुनावों में सपा का दबदबा साफ दिखता रहा था। 2012 में 55%, 2017 में 47% और 2022 में 60% वोट शेयर रहा। वहीं भाजपा लगातार बढ़त बनाते हुए 6% से 35% तक पहुंची। लेकिन 2022 के उपचुनाव में तस्वीर पूरी तरह बदल गई, जहां भाजपा 62% और सपा 36% पर सिमटती नजर आई। इस असामान्य बदलाव को लेकर विपक्षी दल सकते में हैं। इस बड़े बदलाव को लेकर वहीं चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
आंकड़ों से जानिए रामपुर विधानसभा सीट का हाल
मिल्कीपुर (अयोध्या) विधानसभा सीट का भी यही हाल है। 2022 विधानसभा चुनाव में सपा को 48% और भाजपा को 42% वोट मिले थे, जबकि 2024 आम चुनाव में यह अंतर लगभग बरकरार रहा। लेकिन 2025 उपचुनाव में तस्वीर अचानक बदल गई—भाजपा का वोट शेयर बढ़कर 60% पहुंच गया, जबकि सपा 34% पर सिमट गई।
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कन्नौज की छिबरामऊ विधानसभा सीट पर भी उलटफेर सामने आया। भाजपा को 44.31% और सपा को 43.91% वोट मिले, यानी बेहद मामूली अंतर से नतीजा तय हुआ। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वोट कटने की वजह से समाजवादी पार्टी 1111 वोटों से हार गई।
आंकड़ों से जाने मिल्कीपुर का असली हाल
जौनपुर की शाहगंज विधानसभा सीट पर वोट प्रतिशत आंकड़ों के अनुसार भाजपा को 36.21% और सपा को 35.91% वोट मिले, यानी बेहद मामूली अंतर से नतीजा तय हुआ। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वोट कटने की वजह से समाजवादी पार्टी 719 वोटों से हार गई।
गौरतलब है कि पिछले दस वर्षों में केंद्र की सत्ता में रही बीजेपी सरकार के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (प्रवर्तन निदेशालय) ने राजनेताओं पर कई मामले दर्ज किये। विपक्ष का आरोप है कि एजेंसी का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है, जबकि सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए कहती है कि ईडी पूरी तरह स्वतंत्र और कानून के दायरे में काम करती है।
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आंकड़ों के अनुसार कई बड़े नेताओं पर मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में जांच दर्ज हुई है, जिससे पारदर्शिता और एजेंसियों की निष्पक्षता पर बहस तेज हो गई है।
Location : Lucknow
Published : 6 May 2026, 5:30 PM IST