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ममता बनर्जी का इस्तीफा देने से इनकार(Source: Google)
New Delhi: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य में राजनीतिक संकट गहरा गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा हार के बावजूद इस्तीफा न देने के फैसले ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी के इस रुख को 'तानाशाही' और लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताते हुए इसे 'संवैधानिक ईशनिंदा' करार दिया है।
ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए मतगणना में धांधली का गंभीर आरोप लगाया है। उनका दावा है कि लगभग 100 सीटों पर जनादेश को प्रभावित किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस्तीफा नहीं देंगी, क्योंकि उनके अनुसार यह हार जनमत की नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का परिणाम है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ममता बनर्जी का यह व्यवहार हास्यास्पद और चिंताजनक है। पात्रा ने कहा -"भारत की पहचान शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण की रही है। केरल में पिनराई विजयन हों या तमिलनाडु में एमके स्टालिन, सभी ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करते हुए इस्तीफा सौंपा, लेकिन ममता बनर्जी खुद को संविधान से ऊपर समझ रही हैं।"
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने संवैधानिक स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ममता बनर्जी भले ही इस्तीफा न दें, लेकिन 8 मई को विधानसभा भंग होने के साथ ही उनकी सदस्यता और पद की वैधता स्वतः समाप्त हो जाएगी। उन्होंने इसे डॉ. अंबेडकर के संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
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राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह रुख देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक खतरनाक मिसाल पेश कर सकता है। भाजपा ने मांग की है कि ममता बनर्जी को जनादेश का सम्मान करते हुए तुरंत राजभवन जाकर अपना इस्तीफा सौंपना चाहिए।
Location : New Delhi
Published : 6 May 2026, 5:05 AM IST