आगरा ट्रांसपोर्टर मर्डर केस: 44 दिन बाद भी खाली हाथ पुलिस, परिवार बोला- ‘हत्या के आरोपी खुले घूम रहे’

आगरा के ट्रांसपोर्टर असगर अली हत्याकांड में 44 दिन बाद भी पुलिस किसी मुख्य आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। परिवार लगातार हत्या और चौथ वसूली का आरोप लगा रहा है। वायरल ऑडियो, संदिग्ध कार और कई नाम सामने आने के बावजूद जांच धीमी होने पर सवाल उठ रहे हैं।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 18 May 2026, 12:00 PM IST
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Agra: आगरा के ट्रांसपोर्टर असगर अली की मौत अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि पुलिस जांच पर उठते गंभीर सवालों की कहानी बन चुकी है। 44 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस मुख्य आरोपियों तक नहीं पहुंच सकी है। शुरुआत में इस घटना को हादसा मानने वाली पुलिस को बाद में हत्या के सबूत भी मिले, लेकिन इसके बावजूद आरोपी अब तक गिरफ्त से बाहर हैं। परिवार लगातार कह रहा है कि यह सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या थी, जिसके पीछे चौथ वसूली और पुरानी रंजिश का खेल था।

चौथ वसूली का विरोध बना मौत की वजह?

मृतक ट्रांसपोर्टर असगर अली के बेटे अजमन अली का आरोप है कि यमुनापार निवासी रवि यादव और मंटोला निवासी कामरान वारसी उनकी दुकान पर अक्सर वसूली करने आते थे। असगर अली ने इसका विरोध किया था, जिसके बाद आरोपियों ने रंजिश पाल ली। परिवार का दावा है कि इसी वजह से साजिश रचकर उनकी हत्या कर दी गई। अजमन का कहना है कि उन्होंने कई बार पुलिस को सबूत और जानकारी दी, लेकिन कार्रवाई बेहद धीमी है। पुलिस ने रवि यादव और कामरान वारसी के नाम केस में बढ़ाए जरूर हैं, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी।

वायरल ऑडियो ने बढ़ाई हलचल

इस केस में नगर निगम के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अजय यादव और उनकी जीएसटी अधिकारी पत्नी का नाम भी चर्चा में आया। परिवार का आरोप है कि असगर अली ने जीएसटी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत की थी, जिसके बाद उन्हें निशाना बनाया गया। कुछ दिन पहले डॉ. अजय यादव और रवि यादव के बीच बातचीत के कथित ऑडियो भी वायरल हुए थे। दावा किया गया कि हादसे वाली कार में तीन से चार लोग मौजूद थे। हालांकि डॉ. अजय यादव ने इन ऑडियो को फर्जी बताते हुए कहा कि उन्हें बदनाम करने के लिए एआई तकनीक से तैयार किया गया है।

कार, गोशाला और गायब कड़ियों ने बढ़ाए सवाल

जांच में सामने आया कि घटना में इस्तेमाल कार जालौन निवासी प्रेम नारायण के नाम पर थी। बताया गया कि वह आगरा की एक गोशाला में काम करता है, लेकिन पुलिस जब वहां पहुंची तो किसी कर्मचारी ने इस नाम के व्यक्ति की पुष्टि नहीं की। इससे पूरे मामले में और संदेह बढ़ गया है। परिवार सवाल उठा रहा है कि पुलिस को कार बरामद करने में इतना समय क्यों लगा और विभागीय जांच अब तक लंबित क्यों है। वहीं असगर अली की मौत से पहले प्रेस वार्ता कर कुछ लोगों के खिलाफ शिकायत करने की घोषणा भी अब इस केस का अहम हिस्सा बन चुकी है।

Location :  Agra

Published :  18 May 2026, 12:00 PM IST

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