45 दिन का CCTV बैकअप, दान चोरी केस में सबसे बड़ा पेंच; गायब फुटेज और पुराने रिकॉर्ड बन रहे जांच की चुनौती

राम मंदिर दान राशि कथित चोरी मामले में SIT के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुराने सबूत जुटाना है। CCTV कैमरों का बैकअप सिर्फ 45 दिन का होने और फुटेज से छेड़छाड़ के संकेत मिलने के बाद अब जांच टीम संदिग्धों के बयानों और फोरेंसिक जांच पर निर्भर है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 20 June 2026, 9:42 AM IST

Ayodhya: अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान की राशि में कथित चोरी के मामले की जांच कर रही एसआईटी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सबूत जुटाने की है। करोड़ों रुपये के इस मामले में जांच टीम को यह पता लगाना है कि गड़बड़ी कब से चल रही थी, कितनी रकम का नुकसान हुआ और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। लेकिन जांच के दौरान सबसे अहम माने जाने वाले सीसीटीवी फुटेज ही सबसे बड़ी परेशानी बन गए हैं। मंदिर परिसर में लगे कैमरों का बैकअप सिर्फ 45 दिनों का बताया जा रहा है। ऐसे में कई वर्षों पुरानी फुटेज हासिल करना बेहद मुश्किल माना जा रहा है।

CCTV फुटेज पर टिकी थी सबसे बड़ी उम्मीद

किसी भी मामले में घटनास्थल के सीसीटीवी कैमरे सबसे अहम सबूत माने जाते हैं। राम मंदिर दान राशि मामले में भी जांच एजेंसी की सबसे बड़ी उम्मीद कैमरों की रिकॉर्डिंग से थी। लेकिन जांच में सामने आया है कि कुछ फुटेज के साथ छेड़छाड़ के संकेत मिले हैं। इसके अलावा कैमरों का सीमित बैकअप होने की वजह से पुरानी रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि एसआईटी अब फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से फुटेज रिकवर करने की कोशिश करेगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा पुराने डेटा को हासिल किया जा सके।

कब से चल रहा था खेल

मामले की सबसे बड़ी कड़ी यही है कि कथित गड़बड़ी आखिर कब से चल रही थी। अगर कई वर्षों से दान राशि में हेरफेर हुआ है तो उसकी पूरी टाइमलाइन बनाना आसान नहीं होगा। पुराने सीसीटीवी फुटेज नहीं मिलने की स्थिति में जांच टीम को दूसरे सबूतों पर निर्भर रहना पड़ेगा। सूत्रों के मुताबिक, इसी वजह से एसआईटी संदिग्ध कर्मचारियों और पदाधिकारियों से लगातार पूछताछ कर रही है।

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नृपेंद्र मिश्रा के बयान से बढ़ी जांच की अहमियत

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े नृपेंद्र मिश्रा ने एक टीवी इंटरव्यू में बताया था कि कुछ कर्मचारियों द्वारा रुपये की गड्डियां रखकर जाने के मामले के सबूत मिले हैं। उन्होंने यह भी बताया था कि कैमरों का बैकअप करीब डेढ़ महीने का ही है। ऐसे में पुराने रिकॉर्ड खोजना जांच के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। अब एसआईटी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उपलब्ध फुटेज में क्या-क्या सामने आ सकता है और उससे कितनी जानकारी जुटाई जा सकती है।

पुराने फुटेज डिलीट करने का आरोप

ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारी महिपाल सिंह ने आरोप लगाया था कि करीब आठ महीने की फुटेज डिलीट की गई। हालांकि जांच अधिकारियों के सामने समस्या यह है कि ये फुटेज काफी पुरानी बताई जा रही हैं और उनका बैकअप मौजूद नहीं है। ऐसे में यह साबित करना मुश्किल होगा कि वास्तव में फुटेज डिलीट की गई थीं या नहीं। हालांकि अगर पिछले डेढ़ महीने के दौरान किसी तरह की छेड़छाड़ हुई है तो उसके सबूत मिलने की संभावना जताई जा रही है।

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संदिग्धों के बयान बनेंगे जांच का आधार

एसआईटी अब उन लोगों के बयानों पर ज्यादा भरोसा कर रही है, जो मंदिर की दान राशि और गिनती प्रक्रिया से जुड़े रहे हैं। जांच टीम हर कर्मचारी, अधिकारी और संदिग्ध से अलग-अलग पूछताछ कर रही है। इस दौरान कई विरोधाभासी बातें भी सामने आने की बात कही जा रही है। पहले पकड़े गए पांच संदिग्धों से भी पूछताछ की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, उनसे यह जानने की कोशिश हो रही है कि कथित हेरफेर कब से चल रहा था और इसमें कौन-कौन शामिल थे।

रकम और नुकसान का आकलन भी बड़ी चुनौती

जांच एजेंसी के सामने सिर्फ आरोपियों तक पहुंचने की चुनौती नहीं है, बल्कि यह पता लगाना भी जरूरी है कि कथित तौर पर कितनी रकम और कितना कीमती सामान गायब हुआ। दान में आने वाली नकदी, सोना-चांदी और अन्य वस्तुओं का पूरा रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। एसआईटी को इस पूरे मामले की कड़ी जोड़ने में समय लग सकता है, क्योंकि पुराने सबूतों की कमी जांच को लंबा कर सकती है।

Location :  Ayodhya

Published :  20 June 2026, 9:42 AM IST