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प्रतीकात्मक छवि (फोटो सोर्स-इंटरनेट)
New Delhi: भारत में सड़क परिवहन को अधिक सुरक्षित, स्मार्ट और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम देखा जा रहा है। Vehicle-to-Everything यानी V2X कम्युनिकेशन तकनीक को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यह एक ऐसा सिस्टम है जिसमें वाहन, सड़क ढांचा, पैदल यात्री और नेटवर्क आपस में रियल-टाइम डेटा साझा कर सकते हैं। इसका मकसद सड़क पर होने वाली दुर्घटनाओं को कम करना और ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) ने 30 अप्रैल को एक कंसल्टेशन पेपर जारी कर V2X तकनीक का ढांचा पेश किया है। यह अभी विचार-विमर्श के चरण में है, लेकिन इससे यह संकेत मिलता है कि भारत इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इस ढांचे में वाहनों और इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच डेटा शेयरिंग को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
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भारत में सड़क दुर्घटनाएं एक गंभीर समस्या हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में करीब 1.73 लाख लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई। इन हादसों के पीछे कई कारण सामने आते हैं, जैसे चालक का देर से प्रतिक्रिया देना, दूरी का गलत अनुमान लगाना और कम विजिबिलिटी। V2X तकनीक का उद्देश्य इन मानवीय गलतियों को कम करना है, ताकि वाहन खुद ही आसपास के वातावरण को समझकर समय रहते चेतावनी दे सकें।
V2X एक ऐसा नेटवर्क आधारित सिस्टम है जिसमें वाहन लगातार अपनी स्पीड, लोकेशन और मूवमेंट जैसी जानकारी साझा करते रहते हैं। यह डेटा सिर्फ अन्य वाहनों तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि ट्रैफिक सिग्नल, सड़क किनारे लगे सेंसर, पैदल यात्रियों और क्लाउड सिस्टम तक भी पहुंचता है।
इस तकनीक के चार मुख्य हिस्से हैं। पहला, वाहन एक-दूसरे से संवाद कर सकते हैं ताकि टक्कर से बचा जा सके। दूसरा, यह ट्रैफिक लाइट और टोल सिस्टम जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़कर ट्रैफिक को नियंत्रित करता है। तीसरा, यह पैदल यात्रियों को संभावित खतरे की चेतावनी भेज सकता है। चौथा, यह क्लाउड नेटवर्क से जुड़कर रियल-टाइम ट्रैफिक अपडेट और जानकारी प्रदान करता है।
V2X तकनीक में टेलीकॉम नेटवर्क की भूमिका बेहद अहम है। आधुनिक वाहनों में कैमरा, रडार और LiDAR जैसे सेंसर होते हैं, लेकिन ये सीमित दूरी तक ही जानकारी दे सकते हैं। V2X इस सीमा को खत्म कर दूर की जानकारी भी उपलब्ध कराता है।
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अब यह तकनीक Cellular V2X (C-V2X) की ओर बढ़ रही है, जो 4G और 5G नेटवर्क पर आधारित है। इससे वाहनों के बीच तेज और विश्वसनीय डेटा ट्रांसफर संभव होता है और सड़क सुरक्षा को नई मजबूती मिलती है।
दुनिया के अलग-अलग देशों में V2X को अलग-अलग तरीके से अपनाया जा रहा है। यूरोप में पुराने DSRC सिस्टम और नई तकनीक को साथ चलाने की कोशिश हो रही है। चीन ने शुरू से ही C-V2X को अपनाकर बड़े स्तर पर इसका इस्तेमाल शुरू कर दिया है। अमेरिका में इसे पायलट प्रोजेक्ट्स के जरिए आगे बढ़ाया जा रहा है। कई ऑटोमोबाइल कंपनियां भी इस तकनीक पर काम कर रही हैं, जबकि कुछ कंपनियां सेंसर और क्लाउड आधारित सिस्टम पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं।
भारत के लिए यह एक बड़ा अवसर है क्योंकि यहां पुरानी तकनीक का बोझ कम है। सरकार सीधे आधुनिक तकनीक को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। देश में C-V2X तकनीक को अपनाने की योजना है और 5.9 GHz स्पेक्ट्रम बैंड के उपयोग पर विचार किया जा रहा है। शुरुआत में वाहनों के बीच कम्युनिकेशन पर ध्यान दिया जाएगा, जबकि आगे चलकर इसे ट्रैफिक सिस्टम और स्मार्ट सिटी इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ा जाएगा।
Location : New Delhi
Published : 5 May 2026, 11:46 AM IST
Topics : intelligent transport system road safety smart transport tech news traffic management india