JNU को इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस (IOE) टैग की जरूरत क्यों? जानिए क्या है पूरा मामला

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) को (IOE) में शामिल करने की योजना बनाई जा रही है। क्या होती है IOE योजना, जानने के लिए पढ़िए डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

Updated : 4 April 2025, 9:05 AM IST
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नई दिल्ली: सरकार ने 2017 में इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस (IOE) योजना की शुरुआत की थी, जिसके जरिए भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों को वैश्विक रैंकिंग में शामिल करना और उन्हें ज्यादा आजादी दी जाती है। इस योजना के तहत सरकारी विश्वविद्यालयों को ₹1,000 करोड़ तक की वित्तीय सहायता भी दी जाती है, जिससे वे अपने विश्वविद्यालयों में रिसर्च की क्षमताओं और बुनियादी ढांचे को सुधार सकें।

डाइनामाइट न्यूज़ के संवाददाता के अनुसार, JNU की कुलपति प्रोफेसर धूलिपुडी पंडित ने पिछले साल विश्वविद्यालय की वित्तीय चुनौतियों को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि "हम लंबे समय से 'एमिनेंस' टैग की मांग कर रहे हैं। यह टैग मिल जाने से ₹1,000 करोड़ की वित्तीय मदद मिलेगी, जिससे विश्वविद्यालय की आर्थिक तंगी दूर करने मेों काफी मदद मिलेगी।

संसद की एक स्थायी समिति ने सरकार की इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस (IOE) योजना के दायरे को बढ़ाकर दिल्ली स्थित (JNU) को भी इसमें शामिल करने की सिफारिश की है। यह सुझाव शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल पर गठित संसदीय समिति ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए उच्च शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों पर अपनी रिपोर्ट में दिया। 

यह  प्रतिष्ठित टैग अब तक आठ सार्वजनिक संस्थानों को दिया जा चुका है। संसदीय समिति ने JNU को इस सूची में शामिल करने की सिफारिश की है साथ ही साथ  यह भी सुझाव दिया कि जिन विश्वविद्यालयों को पहले ही IoE टैग मिल चुका है, उनके अंतर्गत कॉलेजों को भी ज्यादा आज़ादी दी जानी चाहिए। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) जैसे संस्थानों को इसका फायदा मिलने की उम्मीद है। अगर JNU को IOE टैग मिलता है, तो उसे न केवल आर्थिक मदद मिलेगी, बल्कि विश्वविद्यालय को पाठ्यक्रम और प्रशासनिक निर्णयों में भी ज्यादा स्वतंत्रता मिल पाएगी।

Published : 
  • 4 April 2025, 9:05 AM IST

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