हिंदी
Budget 2026-27 में सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नई रफ्तार देने के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये का कैपेक्स तय किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, सेमीकंडक्टर, बायोफार्मा और MSME समेत टॉप-10 सेक्टर्स को ग्रोथ इंजन बनाने की रणनीति पर फोकस किया गया है।
मैन्युफैक्चरिंग विकास (img Source: Google)
New Delhi: भारत की अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग को लंबे समय से विकास, रोजगार और निर्यात का सबसे मजबूत आधार माना जाता रहा है। 1 फरवरी को संसद में पेश केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नई गति देने का रोडमैप पेश किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में 12.2 लाख करोड़ रुपये के कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) का प्रावधान किया है, जिससे देश के प्रमुख औद्योगिक सेक्टर्स को मजबूती मिलेगी।
खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, सेमीकंडक्टर, बायोफार्मा, केमिकल्स, कैपिटल गुड्स, कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग, रेयर अर्थ और MSME जैसे क्षेत्रों को सरकार ने टारगेट किया है। आइए जानते हैं वे टॉप-10 मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स, जो वर्षों से भारत के ग्रोथ इंजन बने हुए हैं और आने वाले समय में देश को वैश्विक स्तर पर आगे ले जा सकते हैं।
मोबाइल, PCB, कैमरा मॉड्यूल और कंपोनेंट इकोसिस्टम भारत में तेजी से बढ़ रहा है। बजट में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के लिए आउटले बढ़ाकर 40 हजार करोड़ रुपये करने का संकेत दिया गया है, जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी और घरेलू वैल्यू-एडिशन बढ़ेगा।
कपास, मैन मेड फाइबर, गारमेंट्स और टेक्सटाइल पार्क लंबे समय से भारत की ताकत रहे हैं। बजट में टेक्सटाइल को एक्सपोर्ट हब बनाने, क्लस्टर अप्रोच और स्किलिंग पर जोर दिया गया है, जिससे रोजगार और निर्यात दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
भारत पहले ही फार्मा मैन्युफैक्चरिंग में वैश्विक पहचान रखता है। बजट में बायोफार्मा के लिए अगले पांच साल में 10 हजार करोड़ रुपये निवेश और NIPER संस्थानों के अपग्रेड का ऐलान हुआ है, जो हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग की ओर बड़ा कदम है।
कार, दोपहिया और ऑटो कंपोनेंट्स भारत के सबसे बड़े संगठित मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स में हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लस्टर आधारित विकास से इस सेक्टर को लॉजिस्टिक्स और सप्लाई-चेन में फायदा मिलेगा।
स्टील, एल्यूमिनियम और कॉपर आधारित उद्योग भारी उद्योग, रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ हैं। कैपेक्स बढ़ने से इस सेक्टर में मांग और निवेश दोनों बढ़ने की संभावना है।
Union Budget 2026: बजट 2026 में जानिये क्या-क्या हुआ सस्ता और महंगा, पढ़ें ये बड़ी घोषणाएं
स्पेशलिटी केमिकल्स और इंटरमीडिएट्स भारत की औद्योगिक क्षमता का अहम हिस्सा हैं। बजट में तीन केमिकल पार्क के लिए फंडिंग का जिक्र किया गया है, जिससे क्लस्टर आधारित मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा।
ISM 2.0 और चिप इकोसिस्टम पर फोकस के साथ सरकार ने इस हाई-टेक सेक्टर के लिए बजट प्रावधान किए हैं। यह इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो, डिफेंस और टेलीकॉम के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है।
मशीन टूल्स और इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट पूरी मैन्युफैक्चरिंग की नींव हैं। हाई-टेक टूल रूम जैसी घोषणाएं देश की प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाएंगी।
ग्लोबल ट्रेड में कंटेनर स्ट्रैटेजिक एसेट हैं। सरकार ने अगले पांच साल में 10 हजार करोड़ रुपये निवेश का संकेत दिया है, जिससे एक्सपोर्ट और सप्लाई-चेन मजबूत होगी।
भारत की मैन्युफैक्चरिंग की रीढ़ MSME हैं। बजट में 200 MSME क्लस्टर्स को रिवाइव करने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव है, जिससे सप्लायर नेटवर्क और रोजगार को मजबूती मिलेगी।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार FY 2022-23 में भारत का कुल निर्यात 770 अरब डॉलर रहा, जिसमें से 447 अरब डॉलर मैन्युफैक्चरिंग से आया। यह दिखाता है कि मैन्युफैक्चरिंग भारत की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा आधार बनी हुई है।