DN Exclusive: कौन बनेगा सीबीआई का नया निदेशक.. इन दावेदारों पर टिकी निगाहें

मनोज टिबड़ेवाल आकाश

राकेश अस्थाना से भिड़ने के बाद 23 अक्टूबर से ही छुट्टी पर चल रहे सीबीआई के चर्चित निदेशक आलोक वर्मा का कार्यकाल अगले महीने समाप्त हो रहा है। CBI का अगला डायरेक्टर किसे बनाया जाये? इसे लेकर देश के सबसे बड़े सत्ता प्रतिष्ठान साउथ ब्लाक में सुगबुगाहट तेज हो गयी है। शतरंज की बिसात पर अंदरखाने में गोटियां बिछायी जा रही हैं लेकिन बेहद संभलकर। डाइनामाइट न्यूज़ एक्सक्लूसिव..

सीबीआई का लोगो
सीबीआई का लोगो

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी अपने ही शोलों से बुरी तरह जल रही है। छुट्टी पर चल रहे मौजूदा निदेशक आलोक वर्मा का कार्यकाल अगले महीने 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है। इस बीच नये डायरेक्टर की नियुक्ति को लेकर सरकारी कवायद शुरु कर दी गयी है। डाइनामाइट न्यूज़ को अंदर के भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि पहले राउंड में 1983, 1984 और 1985 बैच के 9 आईपीएस अफसरों के नामों पर चर्चा की गयी है। 

पहले राउंड के नौ दावेदार
1.    रीना मित्रा, विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा), गृह मंत्रालय (MP:83)
2.    वाईसी मोदी, डीजी, एनआईए (AM:84)
3.    रजनीकांत मिश्रा, डीजी, बीएसएफ (UP:84)
4.    एसएस देशवाल, डीजी, आईटीबीपी (HY:84)
5.    राजेश रंजन, डीजी, सीआईएसएफ (BH:84)
6.    विवेक जौहरी, विशेष सचिव, रॉ (MP:84)
7.    जावीद अहमद, डीजी, एनआईसीएसएफ (UP:84)  
8.    हितेश चंद्र अवस्थी, डीजी, यूपी सतर्कता विभाग (UP:85) 
9.    अरुण कुमार झा, डीजी, आरपीएफ (UP:85)  

नये निदेशक के लिए नामों पर विचार करते समय इस बात का गंभीरता से ख्याल रखा जा रहा है कि नाम ऐसा हो जिस पर नियुक्ति समिति के दो अन्य सदस्य नेता प्रतिपक्ष और सीजेआई को कोई गंभीर आपत्ति न हो। इनमें से ज्यादातर अफसर सीबीआई में पहले विभिन्न पदों पर का कर चुके हैं।

तीन सदस्यीय कमेटी करेगी चयन
सीबीआई के निदेशक का चयन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की तीन सदस्यीय कमेटी को करना है।

नौ में से 6 हुए रेस से बाहर
भरोसेमंद सूत्रों की मानें तो इन 9 में से 6 नाम कट चुके हैं। इसके कटने के अलग-अलग कारण हैं। वो कहते हैं ना दूध का जला भी फूंक-फूंक कर पीता है, जिस तरह से आलोक वर्मा ने सरकार के खिलाफ पलटी मारी है उसके बाद से नये निदेशक के चयन में सरकार अपने कदम काफी सोच समझकर आगे बढ़ा रही है। इस दौड़ से बाहर होने वाले दो आईपीएस अफसरों जावीद अहमद और अरुण कुमार झा के बारे में दिलचस्प बात निकलकर सामने आ रही है। ये दोनों सीबीआई में काम कर चुके हैं और कई नकारात्मक वजहों से चर्चा में रहे हैं। जावीद यूपी के डीजीपी भी रह चुके हैं। यहां भी ये विवादों में घिरे रहे। मार्च 2017 में योगी सरकार के आने के बाद इन्हें हटा दिया गया था। इसके बाद ये बिहार जाकर धार्मिक सम्मेलनों में शिरकत करने लग गये। झा साहब की कहानी और भी निराली है। इनकी पैरवी पूर्वी उत्तर प्रदेश से आने वाले एक केन्द्रीय मंत्री कर रहे हैं। सीबीआई के अपने कार्यकाल में देश की चर्चित मर्डर मिस्ट्री में से एक नोएडा के आरुषि हत्याकांड को लेकर जिस तरह से इन्होंने तलवार दंपत्ति को क्लिन चिट दी और निर्दोषों को जेल भेजा उससे सुप्रीम कोर्ट तक ने सीबीआई को जमकर जलील किया था। 

दूसरे राउंड में तीन नामों पर मंथन

डाइनामाइट न्यूज़ को मिली जानकारी के मुताबिक दूसरे फेज में तीन नाम बचे हैं जिन पर पूरी गंभीरता से विचार चल रहा है। इन्हीं में से किसी एक नाम के फाइनल होने की प्रबल संभावना है।

वाईसी मोदी ये वो नाम है जिस पर पीएम मोदी खुद भरोसा करते हैं। सारी दुनिया एक तरफ और पीएम मोदी के लिए आईपीएस मोदी एक तरफ। ये वाईसी मोदी ही थे जिन्होंने गुजरात दंगों में पीएम मोदी को क्लिनचिट दी थी। इन्होंने ही सीबीआई में अपनी तैनाती के दौरान गुजरात के चर्चित हरेन पांड्या मर्डर की भी जांच की थी। गुजरात की राजनीतिक लॉबी की चली तो ये इस पद के लिए सरकार की पहली पसंद बनेंगे लेकिन इनकी राह में रोड़ा ये है कि क्या इनके नाम पर खड़गे और गोगोई ग्रीन सिग्नल देंगे?

रजनीकांत मिश्रा यूपी कैडर के रजनीकांत, पीएमओ में बैठे अफसरों की पहली पसंद हैं। दो-दो बार यूपी के डीजीपी की कुर्सी के लिए इनका नाम पुरजोर तरीके से चला और ये 99 तक पहुंच भी गये लेकिन भाग्य इनसे ऐसा रुठा कि ये दिल्ली से लखनऊ नही पहुंच पाये। आम शोहरत के मुताबिक मिश्रा की गिनती योग्य, अनुशासित और ईमानदार अफसरों में होती है लेकिन इनका मामला भाग्य पर अटका है। अगर भाग्य ने साथ दिया तो फिर ये इस बार 100 पर पहुंचने में कामयाब हो जायेंगे।

हितेश चंद्र अवस्थी यूपी कैडर के आईपीएस अवस्थी के बारे में बताया जा रहा है कि ये बेहद ईमानदार और स्ट्रेट फारवर्ड अफसर हैं। ये लंबा वक्त सीबीआई में बीता चुके हैं। जानकारों के मुताबिक इनका कोई पैरोकार नही है ऐसे में मेरिट के आधार पर इनके नाम पर यदि आम सहमति बनती है तो कोई आश्चर्य नही।  
 

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