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नई दिल्ली: ‘ग्रूमिंग गैंग’ का नाम सुनते ही कहा जा रहा है की फिर वही जख्म उभर आए। ‘ग्रूमिंग गैंग्स’ का जिन्न मानों बोतल से बाहर आ गया। वही दरिंदे जिन्होंने मासूम बच्चियों का बचपन छीन लिया था।
बच्चियों के साथ बेरहमी से बलात्कार और उनकी हत्या करने से भी इस गैंग को उन पर तरस नहीं आता था। इस मुद्दे पर शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी से लेकर एलन मस्क, जेके राउलिंग सहित कई बड़े नेता आग उगल रहे हैं। लेकिन क्या इस्से कुछ बदलेगा या फिर हल्ला गुल्ला होकर सब हमेशा की तरह ठंडे बस्ते मे चला जाएगा।
क्या है ग्रूमिंग गैंग्स?
‘ग्रूमिंग गैग्स’ ऐसे लोगों का गैंग था, जो झुंड बनाकर निकलता था और 11 से 16 साल की मासूम बच्चियों को अपना शिकार बनाता था। ये बच्चियां गरीब घरों की होती थी। भोली और नासमझ होने की वजह से ये उन भेड़ियों के जाल में फंस जाती थी। फिर उन्हें नशे की लत लगाकर शुरू होता था हैवानियत का ऐसा खेल जिसे सुनकर रूह कांप उठे। ये भेड़िए झुंड बनाकर बच्चियों को नोचते थे। मासूमों के साथ यह खेल ब्रिटेन में सालों से चल रहा था।
क्यों फिर से ग्रूमिंग गैंग का मामला सुर्खियों में
दरअसल युनाइटेड किंगडम UK में 10 साल की ब्रिटिश-पाकिस्तानी सारा शरीफ की नृशंस हत्या के बाद ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ लोगों का गुस्सा भड़क उठा। मामले ने जोर तब पकड़ा जब दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क ने इस मुद्दे को लेकर ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर को निशाने पर लिया।
उन्होने अपने एक्स हेंडल पर एक पोस्ट भी किया। जिसमें ब्रिटिश पीएम ने मस्क और बाकी लोगों को जबाव देते हुए कहा की वो झूट और अफवाह फैला रहे हैं। वहीं शिवसेना की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने अपने x हेंडल पोस्ट मे लिखा की यह ‘एशियाई’ ग्रूमिंग गैंग नहीं बल्कि ‘पाकिस्तानी’ गैंग हैं।
ग्रूमिंग गैंग्स की बेरहमी की देस्तां
इस गैंग्स द्वारा शिकार मासूम का एक वाक्या ऑक्सफोर्ड का है- जिसमें मोहम्मद करार नाम का एक हैवान जिसने मासूम के साथ जो किया वो दिल दहला देने वाला है। उस हैवान ने पहले उसे एक पंप से गैंग रेप के लिए तैयार किया। इसके बाद पांच से छ लोगों ने मिलकर उसका ब्लात्कार किया।
उस मासूम के मुंह में कपड़ा ठूस दिया ताकी उसकी चीखें सुनाई ना दें। वहीं एक मामला 14 साल की (एना) का है जिसकी शादी उसी हैवान से करा दी गई थी जो उसका रेप करता था। ऐसी ना जाने कितनी मासूम इन दरिंदों का शिकार बव चुकी हैं।
क्या कहते हैं आंकड़े
2010 के दशक की शुरूआत से ही इस मामले पर कई राष्ट्रिय और स्थानिय जांच की गई हैं। वहीं 2023 में ब्रिटिश सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों पर गौर करें तो दोशी ठहराए गए 83% क्रिमिनल श्वेत थे।
वहीं साल 2015 में नेशनल पब्लिक इंक्वाइरी शुरू की गई। जिसमें 300 दिन से ज्यादा सुनवाई की गई और 15 व्यापक जांचें की गईं। 2022 में भी एक जांच में पाया गया कि संगठित गैंग मासूम बच्चियों को अपना शिकार बनाता है।
अब तक कितने लोगों को सजा मिली
रॉदर हेम कांड में ऑपरेशन स्टोववुड के तहत पिछले साल 2024 में सात लोगों को सजा दी गई। लेकिन यह सजा काफी देर बाद मिली और कम लोगों को मिली। सजा मिलने वाले लोगों में मुहम्मद याकूब, मुहम्मद सियाब, यासिर अजेबी, मोहम्मद ज़मीर सादिक,आबिद सादिक, ताहिर और रामिन बारी के नाम शामिल हैं।
सुनिये भोजपुरी के ट्रेंडिंग स्टार खेसारी लाल क्या कह रहे हैं:
Published : 10 January 2025, 8:46 PM IST
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