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नई दिल्ली: कांग्रेस के गलियारों में इन दोनों एक चर्चा बहुत आम है और वह है, "स्वादिष्ट मीट से राज्यसभा सीट।"
इस चर्चा की शुरुआत हाल ही में उस वक्त हुई जब भूतपूर्व कांग्रेसी और वर्तमान में भाजपा के नेता गौरव वल्लभ ने एक पॉडकास्ट के दौरान एक अजीब दावा किया।
वल्लभ का दावा था कि कांग्रेस में एक व्यक्ति को दो बार राज्यसभा सिर्फ इसलिए मिल गई कि वह पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को स्वादिष्ट मीट सप्लाई करता है।
वल्लभ के इस दावे के बाद सोशल मीडिया में लगातार कयासबाजी शुरू हो गई कि आखिर वह नेता कौन है, हालांकि इंटरव्यू लेने वाले ने राज्यसभा सदस्य सैयद नासिर हुसैन के नाम का उल्लेख भी किया था। वैसे, डाइनामाइट न्यूज़ किसी भी नाम की पुष्टि नहीं कर रहा है।
इस मामले के तूल पकड़ने के बाद डाइनामाइट न्यूज ने कांग्रेस के गलियारे में इस पूरे दावे की सच्चाई जानने का फैसला किया। इस दौरान यह पता चला कि जिस नेता के नाम का उल्लेख किया गया उसको लेकर पार्टी के अंदर खाने खूब हंसी मजाक का दौर चल रहा है।
क्या खरगे वाकई मीट के शौकीन हैं?
डाइनामाइट न्यूज़ ने पहले यह जानने की कोशिश की कि क्या खरगे वाकई मीट के शौकीन हैं? इस बारे में पता करने के बाद यह जानकारी हाथ लगी कि खरगे वाकई मीट के शौकीन हैं लेकिन उनकी पत्नी और परिवार के ज्यादातर लोग शाकाहारी है और उनके घर पर कोई नॉनवेज फूड नहीं बनता है और वह खुद घर पर नॉनवेज का सेवन नहीं करते हैं।
इस बारे में खरगे के करीबी एक नेता से पूछा गया तो उन्होंने कहा, "भला यह कोई विश्वास करने वाली बात है कि मीट खिलाकर राज्यसभा सीट मिल सकती है। ऐसा हो तो हर आदमी राज्यसभा पहुंच जाएगा। इस तरह का दावा सिर्फ पब्लिसिटी स्टंट और कांग्रेस की छवि धूमिल करने का प्रयास है।"
कांग्रेस के एक दिग्गज नेता के घर पर जब कुछ लोग इसकी चर्चा कर रहे थे तो इस दौरान वहां पर वह सांसद भी मौजूद थे शायद जिनके बारे में वल्लभ ने दावा किया था।
जब इस बारे में बातचीत शुरू हुई तो उस नेता ने कहा कि सब बकवास बातें हैं क्योंकि उन्हें तो यह भी नहीं पता है कि उनके घर पर जो मीट बनता है वह कहां से आता है।
कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि वल्लभ उन चंद नेताओं में होंगे जिन्हें पार्टी में शामिल होने के 5 साल के भीतर ही दो टिकट मिले और पार्टी के आधिकारिक मंच से उन्हें सैकड़ो बार प्रेस कांफ्रेंस करने का मौका मिला। ऐसे में उन्हें इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए थी।
वल्लभ ने संभवतः जिस सांसद का नाम लिया था, उनका कहना है कि उन्हें करीब दो दशक की कड़ी मेहनत और कांग्रेस के प्रति समर्पण के बाद उच्च सदन में जाने का मौका मिला।
वल्लभ के इस दावे में बहुत हद तक सच्चाई भले ना हो, लेकिन इसने कांग्रेस में उस पूरी इकोसिस्टम को एक बार फिर से सामने ला दिया है जिसके बारे में अक्सर कहा जाता है कि यहां सिर्फ जी हुजूरी करने वालों को तरक्की मिलती है।
Published : 25 March 2025, 11:53 AM IST
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