रायबरेली एम्स में पेट दर्द से पीड़ित को अल्ट्रासाउंड की लिये दे दी गई 15 महीने बाद की तारीख

डीएन संवाददाता

रायबरेली के एम्स में पेट दर्द से पीड़ित व्यक्ति को अल्ट्रासाउंड के लिए 15 महीने बाद की डेट दे दी गई। जिलाधिकारी कार्यालय पर आए शख्स ने दम से मदद की गुहार लगाई है

पीड़ित व्यक्ति
पीड़ित व्यक्ति


रायबरेली: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ( एम्स ) प्रशासन की एक ऐसी खबर आई है जोकि संस्थान कि किरकिरी तो करवा ही रही है साथ ही सुविधाओं का दम भरने की हवा भी निकाल दे रही है। खबर है कि पेट दर्द से परेशान पेशंट को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिये संस्थान ने 15 महीने बाद कि डेट दे दी। पीड़ित पेशंट को मजबूर होकर जिलाधिकारी को शिकायत पत्र देना पड़ा। 

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार जिलाधिकारी कार्यालय पर पहुंचे महराजगंज कोतवाली क्षेत्र के पिंडारी खुर्द गाँव के रहने वाले भीष्म नारायण सिंह पुत्र जंग बहादुर सिंह पेट दर्द से परेशान थे। बेहतर उपचार के लिये आज एम्स आये । एम्स ने डॉक्टर ने जांच की और उसे अल्ट्रा साउंड करवाने के लिये कहा। जब युवक काउंटर पर गया तो अल्ट्रासाउंड विभाग द्वारा उसे 6 मई 2026 की अल्ट्रासाउंड करने की तारीख दे दी गई। 

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भीष्म नारायण सिंह ने बताया कि उसके पेट मे दिक्कत थी तब डॉक्टर ने कहा कि अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ेगा। जब में अल्ट्रासाउंड करवाने गया तो कहा गया डेट लेकर आओ। जब मैं डेट लेने गया तो बताया गया की 2026 की डेट मिलेगी। तब मैंने पूछा कि अभी तो 2025 चल रहा है। लेकिन उन लोगों ने मेरी बात नहीं सुनी। उन्होंने 6 मई 2026 की डेट अल्ट्रासाउंड के लिए दे दी। डॉक्टर साहब ने भी यही कहा कि आप बाहर से करवा लो। गार्ड ने मुझे दो-तीन अल्ट्रासाउंड का नाम भी बताया।  आज जिलाधिकारी के पास आकर समस्या बताई। सक्षम व्यक्ति तो बाहर से अल्ट्रासाउंड करवा लेगा लेकिन गरीब आदमी बाहर से कैसे अल्ट्रासाउंड करवा पाएगा। 

इस मामले में एम्स के प्रवक्ता डॉक्टर नीरज श्रीवास्तव ने कहा कि यह मामला संज्ञान में है अस्पताल में स्टाफ की कमी है। एक ही डॉक्टर है जोकि पेशेंट भी देखते हैं और अल्ट्रासाउंड भी करते हैं। इस लिये समस्या है। कोई पेशेंट अगर बाहर से अल्ट्रासाउंड करा लेता है तो उस रिपोर्ट को भी एम्स प्रशासन मान्य करता है।

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