महराजगंजः विवादित निसवा मदरसे में कुछ भी ठीक नहीं, चूहे कुतर गये बच्चों की परीक्षा तालिका

डीएन संवाददाता

महराजगंज के पनियरा क्षेत्र में विवादित निसवा मदरसे में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। यहां जिलाधिकारी द्वारा गठित टीम जब मंगलवार को औचक निरीक्षण के लिये पहुंची तो टीम को यहां भारी खामियां देखने को मिली है। डाइनामाइट न्यूज़ की रिपोर्ट में पढ़ें टीम को यहां कौन सी भारी खामियां देखने को मिली


महराजगंजः पनियरा में विवादित निसवा मदरसे की मंगलवार को एक बार फिर जांच-पड़ताल की गई है। जिलाधिकारी महराजगंज द्वारा गठित की गई टीम ने मौके पर पहुंचकर विवादित मदरसे का निरीक्षण किया है। उल्लेखनीय है कि उक्त मदरसा तब सुर्खियों आया जब मदरसे की कमेटी में विवाद शुरू हुआ था। जिसमें पता चला कि मदरसे को विभाग ने मान्यता पहले दी और मदरसे की जमीन बाद में खरीदी गयी। 1998 में मदरसे की मान्यता मिली और 2005 में जब विवाद शुरू हो गया तब आनन- फानन में जमीन खरीदी गयी।   

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मदरसे के पूर्व उप प्रबन्धक हासिम अंसारी द्वारा शिकायत करने पर की गयी जांच में शिकायत की पुष्टि भी हो गई। जिसके आधार पर मदरसे के वेतन को रोक दिया गया और मामले को ठंडे बस्ते में जांच के नाम पर डाल दिया गया। फिर जिले की टीम में एसडीएम राजेश और डीआईओएस अशोक कुमार सिंह की चल रही जांच में लगभग तीन सप्ताह पूर्व जिला अधिकारी ने टीम गठित की थी। मामले में आज  जब पनियरा दारुल उलूम निस्वा मदरसे पर जांच टीम पहुंची तो यहां हड़कंप मच गया । जांच टीम में अपर एसडीएम राजेश कुमार जायसवाल,जिला विद्यालय निरीक्षक अशोक कुमार सिंह,आज  फिर पहुची टीम ने कई बिन्दुओं पर जांच की।    

 

 

 

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आज टीम में स्कूल के प्रिंसिपल से बात की और निसवा के 2017-18 के छात्र नामांकन संख्या रजिस्टर मांगां और उन लोगों से उपस्थित आज की संख्या मांगी जो बेमेल रहा। यहां जब अध्यापकों की कुल संख्या पूछी गई तो कई अध्यापक अनुपस्थित मिले और कुछ अध्यापक तो बिना प्रार्थना पत्र दिए ही स्कूल से गायब मिले। जब स्कूल के बच्चों की परीक्षा की तालिका मांगी गई तो घंटों तक अध्यापक तालमटोल करते रहे फिर कुछ देर बाद स्कूल के कर्मियों ने कहा कि बच्चों की परीक्षा की कॉपियों को स्टोर रूम में रखा गया था जिसे चूहों ने कुतर दिया है।

अल्पसंख्यक अधिकारी से मिल जालसाजी कर निकाल लिया गया वेतन       

 

विवादित निसवा मदरसे का औचक निरीक्षण

 

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उक्त विवादित मदरसे के वेतन को जिला अल्पसंख्यक अधिकारी ने रोक दिया था लेकिन मदरसे की प्रिंसिपल ने यह लिख करके दिया कि 1 वर्ष में भवन को बनवा देंगे। बता दें कि प्रबन्धकीय विद्यालय में यह लिखकर देने का अधिकार प्रबन्धक को होता है, प्रिंसिपल के पास ऐसा कोई अधिकार होता ही नहीं है। लेकिन यहां पर एक बार फिर से फर्जीवाड़ा किया गया। उक्त मदरसे में वर्तमान में कमेटी को भंग कर दिया गया है। ऐसे में प्रिंसिपल द्वारा लिखकर देना कहां तक न्याय संगत है साफ साफ दिख रहा है ।  

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एक तरफ जांच दूसरी तरफ रूम में फर्जी हस्ताक्षर का चल रहा था खेल 

 पनियरा निसवा मदरसे की एक तरफ हो रही मदरसे की जांच और उसी छत के नीचे बगल के कमरे में सभी रजिस्टर पर एक महिला कर रही थी बारी- बारी से सभी के फर्जी हस्ताक्षर किये जा रहे थे। यहां जो भारी खामियां देखने को मिली है उसे से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां कितनी भारी खामियां उजागर हो रही है।
 

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