लखनऊ: निर्देशक की अपील, 'गेम ऑफ अयोध्या' फिल्म पर अघोषित रोक हटायें सीएम योगी

डीएन ब्यूरो

अयोध्या मामले को लेकर 6 दिसंबर 1992 के कालखंड पर आधारित फिल्म 'गेम ऑफ अयोध्या' के निर्माता-निर्देशकों का कहना है कि सेंसर बोर्ड ने प्रमाणित और पास होने का बावजूद भी फिल्म के प्रदर्शन को रोकना अभिव्यक्ति की आजादी पर पाबंदी है, जो देश के लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने योगी सरकार से फिल्म लगी अघोषित रोक को हटाने की मांग की है।


लखनऊ: अयोध्या मामले को लेकर बनाई गयी फिल्म 'गेम ऑफ अयोध्या' को एक ज्ञानवर्धक फिल्म करार देते हुए इसके निर्माता-निर्देशकों ने इस पर लगी अघोषित रोक को हटाने की सीएम योगी से अपील की। यह फिल्म 6 दिसंबर 1992 के कालखंड पर आधारित है। फिल्म में इस घटना के बाद फैजाबाद सहित यूपी और देश के अलग-अलग इलाकों में कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आयी, जिसको इस फिल्म कलात्मक तरीके से दर्शाया गया है। इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने पास कर साफ करते हुए कहा है कि सिनेमाघरों में इसको रिलीज करने में कोई कानूनी दिक्कत नहीं है।

फिल्म में शिक्षाप्रद और सुधारवादी संदेश

राजधानी लखनऊ के माल एवेन्यू स्थित एक निजी होटल में फिल्म 'गेम ऑफ अयोध्या' के निर्देशक सुनील सिंह और इस फिल्म के अभिनेता अरुण बख्शी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि फिल्म गेम ऑफ अयोध्या में तत्कालीन समय की छोटी-बड़ी और हर तरह की घटनाओं को बड़ी बारीकी से फिल्माया गया है। यह फिल्म युवाओं में एक नई सोच-समझ पैदा करने के साथ-साथ मानवता का भी संदेश देती है। उन्होंने बताया कि फिल्म में शिक्षाप्रद और सुधारवादी संदेश देने की कोशिश की गयी है।

फिल्म प्रदर्शन रोक रहा प्रशासन

 सुनील सिंह ने कहा कि कुछ हिंदूवादी संगठन फिल्म का विरोध कर रहे हैं। मगर जिला प्रशासन के लोग भी सिनेमा मालिकों को फिल्म न दिखाने की चेतावनी दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि मेरठ, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, लखनऊ आदि जिलों में फिल्म के प्रदर्शन को रोकने के लिए सिनेमा हॉल मालिकों को जिला प्रशासन के लोग मना कर रहे हैं।

अभिव्यक्ति की आजादी पर पाबंदी

उन्होंने बताया कि यह लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी पर पाबंदी है, जो देश के लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने योगी सरकार से फिल्म प्रदर्शन पर लगी रोक को हटाने की मांग की। साथ ही उन्होंने बताया कि फिल्म में इतिहास से किसी तरह से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है।

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