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नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने रेस्टोरेंट बॉडी द्वारा CCPA के 2022 के दिशा-निर्देशों को चुनौती देने की याचिका खारिज करते हुए ग्राहकों के अधिकारों का पक्ष लेते हुए स्पष्ट किया कि सेवा शुल्क और टिप स्वैच्छिक भुगतान हैं। कोर्ट ने कहा कि उपभोक्ता पर इन शुल्कों का अनिवार्य संग्रह करना कानून के विपरीत है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, कोर्ट ने जोर देकर कहा कि भोजन के बिल पर जो सेवा शुल्क जोड़ा जाता है, वह उपभोक्ता द्वारा स्वैच्छिक रूप से भुगतान किया जाना चाहिए। इसे अनिवार्य करना ग्राहकों के अधिकारों के खिलाफ है।
याचिका खारिज: रेस्तरां बॉडी द्वारा CCPA के दिशा-निर्देशों को चुनौती देने की याचिका खारिज कर दी गई, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि होटल और रेस्तरां में ग्राहक को सर्विस चार्ज के भुगतान के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
कानूनी निर्देश: केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA), जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत स्थापित है, ने 2022 में ऐसे दिशानिर्देश जारी किए थे जिसमें होटल और रेस्तरां को ग्राहकों से अनिवार्य रूप से सेवा शुल्क न लेने का निर्देश दिया गया था।
नियम लागू करना अनिवार्य नहीं है
अक्सर देखा जाता है कि ग्राहक जब किसी होटल या रेस्तरां में भोजन के बाद अपने बिल में सर्विस चार्ज जोड़ दिया जाता है। हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले से यह सुनिश्चित हो गया है कि यदि उपभोक्ता स्वैच्छिक टिप या सेवा शुल्क देना चाहते हैं, तो वह कर सकते हैं, लेकिन इसे लागू करना अनिवार्य नहीं किया जा सकता।
यह निर्णय उपभोक्ता संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कोर्ट के इस स्पष्ट निर्णय से रेस्तरां और होटल उद्योग पर ग्राहक हितों को प्राथमिकता देने का दबाव बढ़ेगा, जिससे उपभोक्ता के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
Published : 28 March 2025, 7:19 PM IST
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