हैलो.. मैं डा. अजय पाल शर्मा की गर्लफ्रैंड बोल रही हूं!

मनोज टिबड़ेवाल आकाश

“क्या महिला पत्रकार के चक्कर में अजय पाल शर्मा की हुई एसएसपी नोएडा के पद से छुट्टी?” इस शीर्षक से करीब 40 दिन पहले 9 जनवरी 2019 को डाइनामाइट न्यूज़ पर एक खबर प्रकाशित हुई थी। इसके बाद से 2011 बैच के यूपी कैडर के आईपीएस डा. अजय पाल शर्मा लगातार अनैतिक और गैरकानूनी तरीके से प्रयास कर रहे हैं कि किसी भी तरह से इस खबर को डिलीट करवा दिया जाये। डाइनामाइट न्यूज़ की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट..


नई दिल्ली: वर्दी का गुरुर कोई नई बात नही है, समय-समय पर कुछ लोग इसके शिकार होते रहते है। इन दिनों ताजा नशा छाया है मूल रुप से लुधियाना के रहने वाले यूपी कैडर के 2011 बैच के आईपीएस डा. अजय पाल शर्मा को।

अजय.. शामली और नोएडा के अपने कार्यकालों में काफी चर्चित और विवादित रहे। नोएडा एसएसपी के कार्यकाल में इनकी संदिग्ध कारगुजारियों के चलते सीएम योगी आदित्यनाथ ने सार्वजनिक तौर पर भरी वीडियो कांफ्रेसिंग में जबरदस्त लानत-मलामत की और इनकी वर्दी तक उतरवाने की बात कह दी। इसी से समझा जा सकता है कि इनकी कार्यप्रणाली किस तरह की है और ये आने वाले दिनों में किस तरह पुलिस महकमे का नाम रोशन करेंगे! 

नोएडा के कार्यकाल में ये एक महिला पत्रकार को लेकर बेहद चर्चित रहे। किसी बात पर दोनों के बीच विवाद हुआ और नौबत यहां तक आ गयी कि बीते अगस्त में इस महिला पत्रकार ने यूपी के सीएम, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी को लिखित शिकायत तक कर डाली। मैनेज के खेल में माहिर अजय ने बाद में इस मामले को मैनेज कर लिया।

इन पर यह भी आरोप लगे कि एनकाउंटर की आड़ में यह निर्दोषों को मार एनकाउंटर स्पेशलिस्ट बनने का ढ़ोंग रच रहे हैं औऱ बड़े अपराधियों को अपने निहित स्वार्थों के चलते छोटे-छोटे अपराध में अपनी सरपरस्ती में कोर्ट में सरेंडर करवा रहे हैं।

सीएम योगी के कोप का शिकार होकर नोएडा एसएसपी के पद से हटाये गये डा. अजय पाल शर्मा (फाइल फोटो)

इसकी शिकायतों से आजिज आकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने जनवरी के पहले सप्ताह में नोएडा के एसएसपी पद से हटाकर इन्हें इलाहाबाद पुलिस मुख्यालय में फेंक दिया। अजय के तबादले के दो दिन बाद इनके कार्यकाल पर एक समीक्षात्मक खबर डाइनामाइट न्यूज़ ने 9 जनवरी को प्रकाशित की जिसका शीर्षक था “क्या महिला पत्रकार के चक्कर में अजय पाल शर्मा की हुई एसएसपी नोएडा के पद से छुट्टी?”  (9 जनवरी की खबर को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें)

इस खबर के प्रकाशन के बाद ये बौखला उठे और तरह-तरह के हथकंडे अपनाना प्रारंभ कर दिये कि किसी भी तरह से डाइनामाइट न्यूज़ इस खबर के लिंक को डिलीट कर दे। खबर के प्रकाशन के तुरंत बाद इसने कई लोगों से डाइनामाइट न्यूज़ के पास फोन कराना शुरु कर दिया कि अरे.. साहब ये तो बहुत ही अच्छा अधिकारी है, इसके खिलाफ खबर मत छापिये। इसके करियर पर असर पड़ेगा। वो महिला पत्रकार तो इसकी दोस्त है। इस खबर के बारे में क्या आपके पास सबूत है। तरह-तरह की बातें। साहब.. आप एक बार अजय को बुलाकर मिल लीजिये.. बहुत अच्छा अधिकारी है। काम आयेगा। 

फोन करने वाले ऐसे सभी लोगों को डाइनामाइट न्यूज़ ने स्पष्ट कहा कि यदि डाइनामाइट न्यूज़ पर कोई खबर प्रकाशित हुई है तो उसकी पूर्ण रुप से जिम्मेदारी हमारी है और यहां पर तथ्यों की विस्तृत जांच-पड़ताल के बाद ही खबर प्रकाशित होती है, और रही बात खबर डिलीट करने की तो यह संभव नही। हां किसी को खबर पर आपत्ति है तो वह विधिक कार्रवाई करने को स्वतंत्र है।      

इसके बाद भी समय-समय पर अजय ने अपने करीबी सहयोगियों की मदद से अनैतिक और गैरकानूनी षड़यंत्रों को जारी रखा कि किसी भी तरह खबर डिलीट हो जाये। 

इसी कड़ी में कल यानि 18 जनवरी को अपने आपको वकील बताने वाली एक महिला ने सुबह 9.30 बजे से दोपहर 3.30 बजे तक एक के बाद एक चार फोन काल डाइनामाइट न्यूज़ के नई दिल्ली स्थित संपादकीय विभाग के लैंड लाइन नंबर पर किये। 

इस महिला ने मोबाइल नंबर 99.....011 से फोन कर कहा कि वह गाजियाबाद की रहने वाली है और दिल्ली में प्रैक्टिस करती है। 

2011 बैच के यूपी कैडर के विवादित आईपीएस डा. अजय पाल शर्मा की सरकारी कुंडली

इसके पहले दो बार के फोन को हमारी महिला रिपोर्टर ने उठाया। फोन करने वाली महिला ने कहा कि वह अजय पाल के बारे में प्रकाशित 9 जनवरी की खबर के बारे में बात करना चाहती है। पहले तो इस महिला ने हमारी रिपोर्टर से कहा कि वह भी डा. अजय पाल से पीड़ित है। इस बारे में आपके संपादक जी से वह बात कर कुछ जानकारी देना चाहती है। इस महिला को बताया गया कि सर.. अभी आफिस से बाहर हैं थोड़ी देर बाद आयेंगे। 

थोड़ी देर बाद आये दूसरे काल में इस महिला को हमारी रिपोर्टर ने फिर यही जवाब दिया। 

तीसरे फोन काल में जब इसकी बात डाइनामाइट न्यूज़ के संपादक मनोज टिबड़ेवाल आकाश से हुई तो यह महिला अपनी ही कही विरोधाभासी बातों में फंस गयी। पहली काल में इसने हमारी महिला रिपोर्टर को बताया था कि वह भी अजय पाल से पीड़ित है और तीसरे व चौथे काल में यह अपने आपको डा. अजय पाल शर्मा की गर्लफैंड बताती है। 

महिला तीसरे फोन काल में बार-बार कहती है कि आप मुझे अपना मोबाइल नंबर बता दीजिये ताकि मैं उस पर आपसे बात कर सकूं.. जब उसे बताया गया कि आप लैंड-लाइन पर ही बात करें तो वह इधर-उधर बातों को घूमाते हुए कहने लगी कि मैं बहुत घबरायी हुई हूं.. मेरा नंबर सेफ नही है। मेरा नंबर सर्विलांस पर लगा है। आपके लैंड लाइन पर बात करना मेरे लिए सेफ नही है और मैं आपके पर्सनल मोबाइल पर बात करना चाहती हूं। यह महिला अजीबोगरीब तर्क देते हुए कहती है कि वह हमारे पर्सनल मोबाइल पर बात करेगी तो सुरक्षित रहेगी और यदि आफिस के लैंड-लाइन पर बात करेगी तो असुरक्षित। फिर फोन काट दिया गया। 

चौथी बार कल दोपहर करीब सवा दो बजे फिर इसका फोन मोबाइल नंबर 99.....011 से हमारे आफिस के लैंडलाइन नंबर पर आया (पूरी बातचीत के लिए इस लिंक को क्लिक कर वीडियो देखें) और फिर अपने आप को बेहद शातिर समझने वाली यह महिला अपनी ही बातों में उलझती चली गयी। 

एक तरफ जहां यह अपने आप को डा. अजय पाल शर्मा की गर्लफैंड बताती रही वहीं दूसरी तरफ यह कहती रही कि आपने खबर बिल्कुल सही लिखी है और मैं आपको और जानकारी देना चाहती हूं। जब उससे बार-बार कहा गया कि आप अपनी बात को हमें ई-मेल करें तो यह तरह-तरह के बहाने बनाती रही। इस महिला ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि मैं आपको 9 जनवरी को लिखी गयी खबर से संबंधित महिला पत्रकार का नंबर देना चाह रही हूं आप कृप्या लिख इसे लिख लीजिये.. जब हमने लिखने से इंकार करते हुए इसे कहा कि आप हमारे आफिसियल ई-मेल आईडी पर ई-मेल करें तो फिर यह बहाने बनाने लगी। करीब चार मिनट की बातचीत के बाद इस महिला ने फोन काट दिया। 

इस बारे में जब डाइनामाइट न्यूज़ ने आईपीएस डा. अजय पाल शर्मा से बात कर यह जानने का प्रयास किया कि इस .......  नाम की महिला अपने आपको आपकी गर्लफैंड बता रही है। क्या आप इसे जानते हैं? इस बारे में आपका क्या कहना है? तो अजय की तरफ से कोई रिस्पांस नही मिला।   
 

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