गोरखपुर में एक ही परिवार के 5 लोगों ने की खुदकुशी, जानिए क्या है वजह..

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गोरखपुर में एक ही परिवार के पांच लोगों ने खुदकुशी कर ली है। डाइनामाइट न्यूज़ की रिपोर्ट में पढ़ें क्या है इसके पीछे की वजह...


गोरखपुर: राजघाट थाना क्षेत्र के हसनगंज निवासी रमेश गुप्ता महेवा मंडी में तेल-घी का व्यापार करते थे। कर्ज में डूबे थे। परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। कर्ज में डूबा व्यापारी परेशान था। लिहाज़ा उसने पहले तो अपने परिवार को जहर दे दिया और फिर खुद ट्रेन के सामने कूदकर जान दे दी। मरने वालों में व्यापारी के अलावा उसकी पत्नी, एक बेटा और दो बेटियां शामिल हैं। मरने के पहले बेटी के बयान के आधार पर पुलिस का कहना है कि परिवार ने रज़ामंदी से खुदकुशी की है। माना जा रहा है कि चाय में जहर मिलाकर पूरे परिवार ने पी लिया और जान दे दी। परिवार में अब महज़ बड़ा बेटा रजत बचा है।

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मरने से पहले पूरे परिवार को पिलाया जहर
गोरखपुर के राजघाट थाना क्षेत्र के निवासी  50 वर्षीय रमेश गुप्ता अपने परिवार के साथ एक छोटे से मकान में रहते थे। बड़ा बेटा रजत अलग से किराए के मकान पर रहता है। रमेश गुप्ता महेवा मंडी में तेल-घी का व्यापार करते थे। रविवार को पूरे परिवार के मरने की खबर इलाके में तेजी से फेल गई और रमेश के दरवाजे पर भारी हुजूम जमा हो गया।


शनिवार की रात में रमेश गुप्ता ने अपनी पत्नी 45 वर्षीय सरिता, 20 वर्षीय बेटी रचना उर्फ लवली, 15 वर्षीय बेटी पायल तथा 10 वर्षीय बेटा आयूष को जहरीला पदार्थ पिला सुला दिया। रोजाना की तरह सुबह 8.30 बजे सीढ़ियों से नीचे उतरे और हार्बट बांध होते हुए सूरजकुड रेलवे ट्रैक की तरफ चले गए। बाद में उनकी लाश ट्रैक के पास मिली। 
बड़े बेटे रजत के अनुसार मरने से पहले उन्होंने फोन कर बताया था कि उनकी बहन की तबीयत खराब है इसलिए वे डॉक्टर के पास जा रहे हैं।

बड़ी बेटी ने बताया आर्थिक तंगी के कारण दी जान
बड़ी बेटी रचना ने मरने से पहले अस्पताल में बताया कि उनका परिवार कर्ज से तंग आ गया था इसलिए सबने जहर खा लिया। पुलिस रचना के इसी बयान के आधार पर ही मान रही है कि पूरे परिवार ने रज़ामंदी से खुदकुशी की। 

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दरअसल जैसे ही रमेश घर से बाहर निकले उसके थोड़ी देर बाद रचना कमरे से किसी तरह आंगन तक पहुंची और अपने चचेरी भाई की पत्नी यानि अपनी भाभी को आवाज़ लगाने लगी। भाभी पूर्णिमा जब कमरे में आई तो दंग रह गई। रचना की मां सरिता, बहन पायल तथा छोटा भाई आयूष मृत पड़े हुए थे। यह दृश्य देखकर पूर्णिमा चीखने लगी तो परिवार के अन्य सदस्य भी आ गए और पुलिस को सूचना दी गई। चूंकि रचना अब भी ज़िंदा थी इसलिए उसे मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया लेकिन दोपहर तक उसने जान दे दी। 

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