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महराजगंज: लंबे समय से जिले में ग़दर काट रखे एक महत्वपूर्ण अफ़सर के जिले में दिन पूरे होते दिख रहे हैं। इन दिनों जिले के राजनीतिक और प्रशासनिक अंदरखाने में एक अधिकारी की काली करतूतों की ज़ोरों पर चर्चा है।
यह अफ़सर तमाम तरह के आरोपों में घिरा हुआ है। भयंकर भ्रष्टाचार, झूठ बोलने से लेकर आम जनता का उत्पीड़न इसके रोज़ाना की आदतों में शुमार है।
अंदर की चर्चा यह भी हैं कि तराई के इस जिले में इस अफ़सर का इतना मन रमा कि इसने जिले में रिश्तेदारियाँ तक बनानी शुरू कर दीं।
इस अफ़सर की दागी कार्यप्रणाली के चलते जिले में निष्पक्ष त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव हो पाने पर भी सवालिया निशान है।
नेताओं की चापलूसी में माहिर यह अधिकारी तमाम तरह के आरोपों से घिरा है।
प्रदेश के सबसे भ्रष्टतम अधिकारियों में से एक और गौमाता के चारा चुराने के आरोप में आठ महीने तक निलंबित होकर इस समय राजस्व परिषद जैसे गुमनाम अंधेरे में जीवन काट रहे पूर्व ज़िलाधिकारी अमरनाथ उपाध्याय के इशारे पर हर ग़लत काम करने को उतावला यह अफ़सर इतना मतलबी है कि जब तक अमरनाथ जिले में तैनात रहे, उनका जोड़ीदार बनने को यह तड़पता रहा, लेकिन जैसे ही अमरनाथ पर सीएम की निगाह टेढ़ी हुई, और जिले में नये डीएम की तैनाती हुई तो इसने गिरगिट की तरह रंग बदल हर जगह अमरनाथ की बुराइयाँ शुरू कर दीं और नये डीएम का खास बनने का ढोंग शुरू कर दिया। शुरुआत में कुछ दिन सब ठीक ठाक चला लेकिन जल्द ही काली करतूतों की पोल खुलने लगीं और यह पूरी तरह एक्सपोज़ हो गया।
इस अफ़सर की करतूतों से नाराज़ जिले के सबसे बड़े अफ़सर ने इसके ख़िलाफ़ डीओ लेटर भी शासन को भेज दिया है। जब इस पत्र की गोपनीय जाँच शासन ने करायी तो आरोप सही मिले। डाइनामाइट न्यूज़ को मिली बेहद भरोसेमंद जानकारी के मुताबिक़ अब इस दागी की विदाई की घड़ी नज़दीक आ गयी है।
Published : 24 December 2020, 11:52 AM IST
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