जन्माष्टमी व्रत में भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां: खंडित हो सकती है पूजा, जानें पारण से लेकर भोग के सही नियम

जन्माष्टमी पर रखें भक्ति और सेहत का संतुलन! जानें व्रत और निशीथ काल की पूजा के दौरान किन 7 गलतियों से बचना जरूरी है, ताकि लड्डू गोपाल का आशीर्वाद और व्रत का पूर्ण फल मिल सके। पढ़ें पारण से लेकर भोग तक के सही नियम।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 4 September 2026, 8:50 AM IST
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New Delhi: आज कृष्ण जन्माष्टमी है और जन्माष्टमी का पावन पर्व देशभर में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। भक्त भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए दिनभर उपवास रखते हैं। अक्सर लोग रात 12 बजे बजते ही व्रत खोल लेते हैं, जो गलत है। व्रत का पारण हमेशा अपने परिवार की परंपरा, स्थानीय मंदिर के नियमों और निशीथ काल की पूजा समाप्त होने के बाद ही करना चाहिए।

निशीथ काल का समय न चूकें

भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी पर निशीथ काल की पूजा का बहुत बड़ा महत्व है। वर्ष 2026 में दिल्ली-एनसीआर में निशीथ मुहूर्त रात लगभग 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा। इस दौरान किसी भी जल्दबाजी से बचने के लिए लड्डू गोपाल के श्रृंगार, पोशाक और भोग की व्यवस्था पहले से करके रखें।

सेहत से न करें खिलवाड़

व्रत का मुख्य उद्देश्य मन की शुद्धि और भक्ति है, शरीर को कष्ट देना नहीं। यदि आप बुजुर्ग, गर्भवती हैं या किसी बीमारी से जूझ रहे हैं, तो कठोर निर्जला व्रत रखने के बजाय फलहार, दूध और पानी का सेवन करें।

सात्विकता और अनाज से परहेज

जन्माष्टमी के व्रत में अनाज और तामसिक भोजन का पूरी तरह त्याग किया जाता है। भगवान के लिए भोग बनाते समय भी घर की शुद्धता और मर्यादा का ध्यान रखें। फलाहार में केवल सेंधा नमक और व्रत योग्य चीजों का ही प्रयोग करें।

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मन की पवित्रता भी है जरूरी

केवल भोजन छोड़ने से व्रत पूरा नहीं होता। व्रत के दिन गुस्सा करना, चुगली करना या बहस में उलझना आपकी पूजा के फल को कम कर सकता है। इस दिन अपना ध्यान भजन, कीर्तन और कृष्ण नाम के जाप में लगाएं।

लड्डू गोपाल की भावपूर्ण पूजा

बाल गोपाल का अभिषेक और पूजन केवल औपचारिकता न समझें। उन्हें प्रेमपूर्वक स्नान कराएं, सुंदर वस्त्र पहनाएं, फूल अर्पित करें और शांति के साथ आरती करें। जल्दबाजी में की गई पूजा के मुकाबले शांत चित्त से की गई थोड़ी सी भक्ति भी श्रेष्ठ मानी जाती है।

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बिना भोग लगाए न करें प्रसाद ग्रहण

जन्माष्टमी के दिन जो भी फलाहार या पकवान बनाया जाए, उसे सबसे पहले लड्डू गोपाल को अर्पित करें। भगवान को भोग लगाने के बाद ही उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।

Location :  New Delhi

Published :  4 September 2026, 8:50 AM IST

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