एक फोन कॉल और बैंक में जमा हुए करोड़ों; आखिर क्यों IAS अफसरों ने IDFC बैंक पर लुटाया सरकारी खजाना? जानिए उस हस्ताक्षर का सच!

सरकारी विभागों की करोड़ों की रकम निजी बैंकों में सीमा से ज्यादा क्यों जमा कराई गई? FD के नाम पर भेजा गया पैसा आखिर कहां पहुंचा और सोने-ज्वेलरी से लेकर शेयर बाजार तक इसका इस्तेमाल कैसे हुआ? CBI की तीसरी चार्जशीट ने पूरे मामले में कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 4 September 2026, 9:37 AM IST
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Chandigarh: हरियाणा के चर्चित 504 करोड़ रुपये के IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की तीसरी चार्जशीट के बाद मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। पंचकूला की विशेष अदालत में दाखिल इस आरोप पत्र में 6 वरिष्ठ IAS अधिकारियों समेत कुल 19 लोगों को आरोपी बनाया गया है। चार्जशीट के बाद तीन वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी की संभावना को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।

तीसरी चार्जशीट में 19 लोगों के नाम

CBI की ताजा कार्रवाई में डॉ. साकेत कुमार, विनीत गर्ग और मोहम्मद शाइन समेत 6 वरिष्ठ IAS अधिकारियों को नामजद किया गया है। चार्जशीट सामने आने के बाद इन अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में आ गई है और तीन अधिकारियों पर गिरफ्तारी का खतरा मंडराने की बात कही जा रही है।

पहले तीन IAS अधिकारी हो चुके गिरफ्तार

इस मामले में CBI पहले ही तीन IAS अधिकारियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें प्रदीप कुमार, राम कुमार सिंह और पंकज अग्रवाल शामिल हैं। बताया गया है कि प्रदीप कुमार की गिरफ्तारी उनके रिटायरमेंट वाले दिन हुई थी, जिससे उस समय यह मामला काफी चर्चा में आया था।

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आठ सरकारी विभागों के फंड पर उठे सवाल

जांच के मुताबिक, हरियाणा सरकार के 8 अलग-अलग विभागों की बड़ी रकम निर्धारित बैंकिंग सीमा से अधिक निजी बैंकों में जमा कराई गई। इन विभागों में पंचायत विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और कृषि विपणन बोर्ड समेत अन्य सरकारी संस्थान शामिल बताए गए हैं। रकम IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में जमा कराई गई थी।

FD के नाम पर भेजी गई रकम का क्या हुआ?

आरोप है कि सरकारी धन को फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD कराने के उद्देश्य से बैंक खातों में भेजा गया, लेकिन बाद में इन रकमों की वास्तविक FD या उससे संबंधित रिकॉर्ड नहीं मिला। जांच एजेंसी के अनुसार, रकम को कथित तौर पर दूसरे फर्जी खातों में ट्रांसफर किया गया और इस तरह सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला सामने आया।

सोने और ज्वेलरी में भी लगाया गया पैसा

CBI की जांच में कथित तौर पर गबन की गई रकम के इस्तेमाल के कई तरीके सामने आए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, करीब 20 करोड़ रुपये की राशि से सोना और आभूषण खरीदे गए। छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी ने इनसे जुड़ी संपत्तियां जब्त किए जाने की बात कही है। इसके अलावा रकम का इस्तेमाल शेयर बाजार और रियल एस्टेट में निवेश के लिए किए जाने के आरोप भी हैं।

अब तक 37 आरोपी और 26 गिरफ्तार

मामले में अलग-अलग चार्जशीट के आधार पर अब तक कुल 37 लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है। इनमें सरकारी अधिकारी, बैंक से जुड़े कर्मचारी और कथित बिचौलिये शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अब तक 26 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

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किन धाराओं में दर्ज है मामला?

CBI ने आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा, सबूत मिटाने और खातों में हेराफेरी जैसे गंभीर आरोपों के तहत कार्रवाई की है। इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं।

IAS अधिकारियों की भूमिका पर जांच जारी

तीसरी चार्जशीट के बाद अब जांच का फोकस उन वरिष्ठ अधिकारियों की कथित भूमिका पर है, जिनके नाम आरोप पत्र में शामिल किए गए हैं। हालांकि, किसी आरोपी की दोषसिद्धि अदालत के अंतिम फैसले के बाद ही मानी जाएगी। CBI की आगे की कार्रवाई और अदालत में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि मामले में कौन-कौन से आरोप साबित होते हैं।

Location :  Chandigarh

Published :  4 September 2026, 9:37 AM IST

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