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जालना कलेक्टर IAS आशिमा मित्तल (Img- X)
Mumbai: महाराष्ट्र के अंतरवाली सराटी में मराठा आरक्षण को लेकर माहौल एक बार फिर गरमा गया है। आंदोलनकारी नेता मनोज जरांगे पाटिल की 11वीं भूख हड़ताल के पांचवें दिन एक ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
राज्य सरकार का पक्ष लेकर प्रदर्शन स्थल पर पहुंचीं जालना की जिला कलेक्टर और 2018 बैच की आईएएस (IAS) अधिकारी आशिमा मित्तल को आंदोलनकारियों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। जरांगे पाटिल ने तीखे तेवर दिखाते हुए उनसे कह दिया कि 'अगर सिर्फ सरकार की बात कहनी है तो आप जा सकती हैं।' लेकिन कड़े शब्दों के बावजूद युवा कलेक्टर ने न तो आपा खोया और न ही मैदान छोड़ा।
जयपुर, राजस्थान की रहने वाली आशिमा मित्तल की पहचान एक बेहद प्रतिभाशाली अफसर के तौर पर होती है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT बॉम्बे से सिविल इंजीनियरिंग में B.Tech किया है। अपनी बेहतरीन पढ़ाई के लिए उन्हें शंकर दयाल शर्मा गोल्ड मेडल से भी नवाजा जा चुका है। इसके बाद उन्होंने एंथ्रोपोलॉजी में MA किया और साल 2018 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 12वीं रैंक हासिल कर IAS बनीं।
महाराष्ट्र कैडर मिलने के बाद आशिमा मित्तल ने दहानू में असिस्टेंट कलेक्टर और नासिक जिला परिषद में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी। नासिक में उनके द्वारा शुरू किया गया 'सुपर 50' नामक शैक्षणिक कार्यक्रम काफी लोकप्रिय हुआ, जिसने जरूरतमंद छात्रों को बेहतर भविष्य का रास्ता दिखाया।
30 जुलाई 2025 को जालना के कलेक्टर पद की कमान संभालने के बाद से ही वह राज्य के सबसे संवेदनशील माने जाने वाले मराठा आरक्षण आंदोलन को बेहद सूझबूझ के साथ संभाल रही हैं।
जरांगे पाटिल की बिगड़ती सेहत और प्रदर्शनकारियों के बढ़ते दबाव के बीच आशिमा मित्तल की यह मुलाकात केवल एक औपचारिक सरकारी औपचारिकता नहीं थी। उन्होंने जरांगे पाटिल से अनशन खत्म कर अपनी सेहत पर ध्यान देने की अपील की और सरकार द्वारा मराठा समाज के हित में लिए गए फैसलों की सूची पढ़कर सुनाई। विरोध के बावजूद बातचीत के दरवाजे खुले रखना और कानून-व्यवस्था को बनाए रखना उनकी प्रशासनिक दक्षता और धैर्य को दर्शाता है।
Location : Mumbai
Published : 3 September 2026, 11:30 AM IST