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दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा (सोर्स-एक्स)
New Delhi: आधुनिकता, अंधी दौड़ और तकनीक के इस दौर में इंसानी रिश्ते लगातार फीके पड़ते जा रहे हैं। लोग सोशल मीडिया पर तो एक-दूसरे से जुड़े हैं, लेकिन दिलों की दूरियां बढ़ती जा रही हैं। ऐसे माहौल में तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा का एक बेहद भावुक और आंखें खोलने वाला संदेश इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने एक वीडियो में साफ किया कि उनके जीवन में अच्छाई और करुणा का पाठ पढ़ाने वाला कोई बड़ा विश्वविद्यालय या धार्मिक ग्रंथ नहीं था, बल्कि वह कोई और ही था।
मूल रूप से 25 जून 2018 को रिकॉर्ड किया गया यह वीडियो आज के डिजिटल युग में पहले से कहीं ज्यादा प्रासंगिक हो गया है, यही वजह है कि लोग इसे जमकर शेयर कर रहे हैं।
दलाई लामा ने अपने संदेश में बेहद सरल शब्दों में कहा कि उनके जीवन की सबसे पहली और सबसे बड़ी शिक्षक उनकी मां थीं। उन्होंने बताया कि उनकी मां ने उन्हें केवल किताबी बातें या उपदेश नहीं दिए, बल्कि अपने जीने के तरीके से यह दिखाया कि दूसरों के प्रति दयालु कैसे रहा जाता है। मां का धैर्य, उनका बेपनाह स्नेह और हर किसी के प्रति उनकी संवेदनशीलता ही दलाई लामा के लिए जीवन का सबसे बड़ा स्कूल बन गई। उनके अनुसार, इंसान के जीवन के असली और सबसे महत्वपूर्ण मूल्य घर से ही मिलते हैं।
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इस संदेश का सबसे बड़ा निचोड़ यह है कि बच्चे वो नहीं करते जो उन्हें करने को कहा जाता है, बल्कि वो उसकी नकल करते हैं जो वे अपने घर में देखते हैं। आज के माता-पिता बच्चों को नैतिक शिक्षा देने के लिए तमाम जतन करते हैं, लेकिन यदि खुद उनके अपने व्यवहार में गुस्सा और कड़वाहट हो, तो बच्चों पर उसका कोई असर नहीं होता। दलाई लामा याद दिलाते हैं कि माता-पिता का हर एक कदम बच्चों के लिए एक शांत शिक्षा की तरह होता है। अगर घर में प्रेम और सम्मान का माहौल होगा, तो बच्चे भी वैसे ही बनेंगे।
My First Teacher of Compassion - His Holiness the Dalai Lama reflects on his mother as the first teacher to introduce him to the value of compassion — not only through word, but through action. Video originally recorded on June 25, 2018. pic.twitter.com/b3FPzhOWC3
— Dalai Lama (@DalaiLama) July 17, 2026
अक्सर लोग दूसरों के दुख को देखकर दया दिखाने को ही करुणा मान लेते हैं, लेकिन दलाई लामा के अनुसार यह सोच अधूरी है। करुणा का असली मतलब है किसी दूसरे के दर्द को गहराई से महसूस करना और उसे दूर करने की कोशिश करना। आध्यात्मिक गुरु का मानना है कि करुणा कोई कमजोरी नहीं है, बल्कि यह इंसान की सबसे बड़ी शक्ति है। यही वह भावना है जो टूटते हुए परिवारों को जोड़ती है, समाज में भरोसा पैदा करती है और दुनिया से नफरत व हिंसा को मिटा सकती है।
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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग आमने-सामने बैठकर बात करना भूल चुके हैं। ऐसे में दलाई लामा का यह पुराना वीडियो समाज के लिए एक कड़वी हकीकत बयां करता है। यदि परिवारों के भीतर एक-दूसरे के प्रति सम्मान और धैर्य खत्म हो जाएगा, तो इसका सीधा असर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ेगा। इसलिए आज के दौर में यह संदेश केवल एक विचार नहीं, बल्कि पूरे समाज को बचाने की एक बड़ी जरूरत बन चुका है।
दलाई लामा हमेशा से कहते आए हैं कि आधुनिक शिक्षा का मकसद सिर्फ डिग्री देना या पैसा कमाने की मशीन बनाना नहीं होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति बहुत पढ़ा-लिखा और अमीर है, लेकिन उसके भीतर इंसानों के लिए कोई संवेदना नहीं है, तो उसकी सफलता पूरी तरह अधूरी है। शिक्षा का असली मकसद एक बेहतर इंसान तैयार करना है।
Location : New Delhi
Published : 19 July 2026, 3:44 PM IST
Topics : Dalai Lama Message Dalai Lama Mother Video Dalai Lama Viral Video Family Education Parenting Tips