Chaitra Navratri 2026: अष्टमी या नवमी… कब करें कन्या पूजन? जानें सही मुहूर्त और नियम

नौ दिनों तक चलने नवरात्रि के उत्सव में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। महाष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, सही विधि, कन्याओं की संख्या और जरूरी नियम, जिससे मां दुर्गा की कृपा प्राप्त कर जीवन में सुख-समृद्धि लाई जा सकती है।

Updated : 25 March 2026, 12:31 PM IST
google-preferred

New delhi: चैत्र नवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इनमें महाष्टमी का दिन खास महत्व रखता है, जो मां महागौरी को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वर्ष 2026 में दुर्गा अष्टमी 26 मार्च को मनाई जाएगी।

कब करें कन्या पूजन?

कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि कन्या पूजन अष्टमी के दिन करना चाहिए या नवमी के दिन। शास्त्रों के अनुसार, दोनों ही तिथियां कन्या पूजन के लिए शुभ मानी गई हैं। जो श्रद्धालु अष्टमी का व्रत रखते हैं, वे इसी दिन कन्या पूजन करते हैं। वहीं, कुछ लोग नवमी के दिन व्रत का पारण करके कन्या पूजन करना अधिक शुभ मानते हैं। ऐसे में आप अपनी परंपरा और सुविधा के अनुसार किसी भी दिन पूजन कर सकते हैं।

Chaitra Navratri 2026: क्या आप भी पाना चाहते नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा आशीर्वाद, तो जानें महत्व और अचूक उपाय

अष्टमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, अष्टमी के दिन कन्या पूजन के लिए कई शुभ समय बताए गए हैं। इन मुहूर्तों में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

  • पहला मुहूर्त: सुबह 6:16 बजे से 7:48 बजे तक
  • दूसरा मुहूर्त: सुबह 10:56 बजे से दोपहर 2:01 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:02 बजे से 12:52 बजे तक

इनमें से किसी भी समय में कन्या पूजन करना शुभ माना गया है।

कन्या पूजन के जरूरी नियम

कन्या पूजन करते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक होता है, जिससे पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।

  • उम्र का ध्यान रखें: पूजन के लिए 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को आमंत्रित करना उत्तम माना गया है।
  • कन्याओं की संख्या: शास्त्रों में 9 कन्याओं का पूजन सर्वोत्तम बताया गया है। अगर यह संभव न हो, तो 2, 5 या 7 कन्याओं का पूजन भी किया जा सकता है।
  • बटुक भैरव का महत्व: कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को भी आमंत्रित करना जरूरी होता है। इसे बटुक भैरव का रूप माना जाता है और इनके बिना पूजन अधूरा माना जाता है।

कन्या पूजन की विधि

कन्या पूजन की प्रक्रिया को पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ करना चाहिए।

सबसे पहले घर में आमंत्रित कन्याओं के चरण धोकर उन्हें साफ और पवित्र स्थान पर बैठाएं। इसके बाद उनके माथे पर कुमकुम और अक्षत से तिलक लगाएं और हाथ में कलावा बांधें। फिर उन्हें माता का प्रसाद जैसे पूरी, काले चने और हलवा प्रेमपूर्वक परोसें।

भोजन के बाद कन्याओं को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा, उपहार या फल दें। अंत में उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। ऐसा करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

Navratri 2025: नवरात्रि की कौन सी तिथि है आज? षष्ठी या सातवीं, जानें किस देवी की होगी पूजा

पूजन से मिलने वाले लाभ

मान्यता है कि अष्टमी के दिन विधि-विधान से कन्या पूजन करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है, आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और व्यक्ति को सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यह दिन विशेष रूप से मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 25 March 2026, 12:31 PM IST

Advertisement