Amarnath Yatra 2026: मुस्लिम गड़रिये ने की थी बाबा अमरनाथ की खोज, जानें कब और किसने किए थे पहले दर्शन?

अमरनाथ में हिमलिंग पिघलने के बीच पवित्र गुफा की खोज का इतिहास चर्चा में है। जानिए कैसे 500 साल पहले मुस्लिम गड़रिये बूटा मलिक ने इस पावन धाम को खोजा था और क्या है महर्षि भृगु से जुड़ा इसका पौराणिक संबंध। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 10 July 2026, 10:06 AM IST
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New Delhi: इस साल की अमरनाथ यात्रा शुरू होते ही एक बार फिर देश भर में सुर्खियों में आ गई है। यात्रा शुरू होने के कुछ ही दिनों के भीतर पवित्र गुफा में मौजूद प्राकृतिक हिमलिंग के पूरी तरह पिघल जाने की खबरें सामने आई हैं। इस खबर के बाद श्रद्धालुओं के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। बताया जा रहा है कि हिमलिंग पिघलने से पहले एक लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा बर्फानी के पावन दर्शन कर चुके थे।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग, बढ़ता तापमान, जलवायु परिवर्तन और कम समय में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी इस हिमलिंग के समय से पहले पिघलने की मुख्य वजह हो सकती है। दूसरी ओर, अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने इसे एक पूरी तरह से स्वाभाविक और प्राकृतिक प्रक्रिया बताया है। इस पूरी घटना के बीच अमरनाथ गुफा के इतिहास और उसकी खोज को लेकर पुरानी यादें और कहानियां एक बार फिर जीवंत हो उठी हैं।

मुस्लिम गड़रिये बूटा मलिक और अमरनाथ की खोज का रहस्य

अमरनाथ गुफा से जुड़ी सबसे लोकप्रिय लोक कथाओं में कहा जाता है कि करीब 500 साल पहले एक मुस्लिम गड़रिये बूटा मलिक ने इस पवित्र स्थान को खोजा था। हालांकि, इस दावे को लेकर इतिहासकारों और धार्मिक विद्वानों के बीच हमेशा से अलग-अलग मत रहे हैं। लोक कथा के अनुसार, पहलगाम क्षेत्र के रहने वाले चरवाहे बूटा मलिक एक दिन अपनी भेड़-बकरियां चराते हुए काफी आगे निकल गए थे। रास्ते में उनकी मुलाकात एक रहस्यमयी साधु से हुई।

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साधु ने उन्हें कोयले से भरी एक कांगड़ी (मिट्टी का पात्र) दी, जो घर पहुंचने पर सोने में बदल गई। अगले दिन जब बूटा मलिक आभार जताने दोबारा उस स्थान पर पहुंचे, तो साधु गायब थे और वहां उन्हें बर्फ से बना एक विशाल, अलौकिक शिवलिंग दिखाई दिया। इसके बाद उन्होंने अन्य साधुओं को इसकी जानकारी दी और धीरे-धीरे यह पावन धाम प्रसिद्ध हो गया। आज भी बटकोट क्षेत्र में रहने वाले बूटा मलिक के वंशजों का नाम इस यात्रा के इतिहास से सम्मानपूर्वक जोड़ा जाता है।

कब शुरू हुई थी पहली अमरनाथ यात्रा?

ऐतिहासिक दस्तावेजों में अमरनाथ यात्रा की किसी निश्चित तारीख या वर्ष की शुरुआत का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड दर्ज नहीं है। धार्मिक ग्रंथों और इतिहासकारों के अनुसार, यह तीर्थ क्षेत्र सदियों पुराना और अनादि है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अमरनाथ ही वह परम पवित्र स्थान है जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को मृत्युलोक से मुक्ति और अमरत्व का परम रहस्य (अमरकथा) सुनाया था। इसी वजह से यह गुफा सनातन धर्म के सबसे शीर्ष और पवित्र तीर्थ स्थलों में गिनी जाती है। हर साल देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु समुद्र तल से लगभग 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस दुर्गम गुफा तक बेहद कठिन पहाड़ी रास्तों को पार कर बाबा बर्फानी का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।

महर्षि भृगु थे बाबा बर्फानी के सबसे पहले दर्शनार्थी

धार्मिक ग्रंथ 'भृगु संहिता' के अनुसार, अमरनाथ गुफा के सबसे पहले दर्शन करने का सौभाग्य महर्षि भृगु को मिला था। पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय पूरी कश्मीर घाटी जलमग्न (पानी में डूबी) हो गई थी। तब महर्षि कश्यप ने अपनी दिव्य शक्तियों, नदियों और जलधाराओं के माध्यम से उस पानी को बाहर निकाला था। घाटी के सूखने के बाद महर्षि भृगु हिमालय में तपस्या के लिए एकांत और उपयुक्त स्थान की तलाश करते हुए इस अलौकिक गुफा तक पहुंचे, जहां उन्होंने पहली बार प्राकृतिक हिम शिवलिंग के साक्षात दर्शन किए। इसी कारण कई धार्मिक मान्यताओं में महर्षि भृगु को अमरनाथ का पहला आधिकारिक तीर्थयात्री माना जाता है।

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हिमलिंग पिघलने के बावजूद जारी रहेगी यात्रा

प्राकृतिक हिमलिंग के समय से पहले पिघल जाने के बावजूद अमरनाथ श्राइन बोर्ड और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रा अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही आगे बढ़ेगी। इस साल यह पवित्र यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई थी और इसका समापन 28 अगस्त को रक्षाबंधन के पावन अवसर पर होगा। जम्मू-कश्मीर प्रशासन और सुरक्षा बलों ने आने वाले सभी श्रद्धालुओं से केवल वैध रजिस्ट्रेशन के साथ ही यात्रा मार्ग पर आगे बढ़ने और सभी जरूरी सुरक्षा व स्वास्थ्य निर्देशों का कड़ाई से पालन करने की भावुक अपील की है।

Location :  New Delhi

Published :  10 July 2026, 10:06 AM IST

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