महज 39 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा, लेकिन आज भी हर दिल पर राज करते हैं गुरुदत्त… जानिए उनकी 5 अमर फिल्में

भारतीय सिनेमा के महान कलाकार गुरु दत्त की 101वीं जयंती पर उनकी यादगार फिल्मों और योगदान को याद किया जा रहा है। महज 39 साल की उम्र में दुनिया छोड़ने वाले गुरु दत्त ने 'प्यासा', 'कागज के फूल' और 'साहिब बीबी और गुलाम' जैसी कालजयी फिल्में देकर अमिट छाप छोड़ी।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 9 July 2026, 1:43 PM IST
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New Delhi: भारतीय सिनेमा के महान अभिनेता, निर्देशक, निर्माता और लेखक गुरुदत्त की 101वीं जयंती पर देशभर में उन्हें याद किया जा रहा है। 9 जुलाई 1925 को जन्मे गुरुदत्त ने बेहद कम उम्र में हिंदी सिनेमा को ऐसी कालजयी फिल्में दीं, जो आज भी क्लासिक मानी जाती हैं। महज 39 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी कला और फिल्मों का जादू आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित है।

कम उम्र में रच दिया इतिहास

गुरुदत्त का असली नाम वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक डांसर के रूप में की, लेकिन जल्द ही निर्देशन, अभिनय, लेखन और फिल्म निर्माण में अपनी अलग पहचान बना ली। उनकी फिल्मों की खासियत संवेदनशील कहानी, बेहतरीन सिनेमैटोग्राफी और गहरे सामाजिक संदेश रहे।

उनकी कई फिल्मों को समय के साथ वह सम्मान मिला, जो रिलीज के वक्त नहीं मिल पाया था।

'प्यासा' ने दिलाई अमर पहचान

साल 1957 में रिलीज हुई 'प्यासा' को गुरुदत्त की सबसे बेहतरीन फिल्मों में गिना जाता है। फिल्म का गीत "ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है" आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली गीतों में शामिल है। इस फिल्म को Time Magazine ने दुनिया की 100 महान फिल्मों की सूची में भी जगह दी थी।

ये हैं गुरुदत्त की 5 सबसे यादगार फिल्में

1. आर-पार (1954)

कॉमेडी, रोमांस और क्राइम का अनूठा मिश्रण। टैक्सी ड्राइवर की कहानी पर आधारित इस फिल्म ने गुरुदत्त को नई पहचान दिलाई।

2. प्यासा (1957)

एक संवेदनशील कवि की कहानी, जो समाज की बेरुखी और इंसानी रिश्तों की सच्चाई को दर्शाती है। यह भारतीय सिनेमा की सबसे महान फिल्मों में शामिल है।

3. कागज के फूल (1959)

रिलीज के समय फ्लॉप रही यह फिल्म बाद में कल्ट क्लासिक बनी। फिल्म की कहानी को गुरुदत्त के निजी जीवन से भी जोड़कर देखा जाता है।

4. चौदहवीं का चाँद (1960)

दो दोस्तों और एक खूबसूरत लड़की की प्रेम कहानी पर आधारित यह फिल्म अपने संगीत और शानदार प्रस्तुति के लिए आज भी याद की जाती है।

5. साहिब बीबी और गुलाम (1962)

बिमल मित्र के प्रसिद्ध उपन्यास पर आधारित यह फिल्म रिश्तों, अकेलेपन और सामाजिक बदलाव की मार्मिक कहानी बयां करती है।

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आज भी अमर है गुरु दत्त की विरासत

गुरुदत्त ने भले ही कम उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनकी फिल्मों ने उन्हें अमर बना दिया। भारतीय सिनेमा में उनका योगदान आज भी नई पीढ़ी के फिल्मकारों और कलाकारों के लिए प्रेरणा बना हुआ है।

Location :  New Delhi

Published :  9 July 2026, 1:43 PM IST

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