जल जीवन मिशन घोटाला : 20 हजार करोड़ के घोटाले का आरोपी पूर्व IAS दिल्ली से गिरफ्तार

राजस्थान एसीबी ने जल जीवन मिशन घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। फर्जी सर्टिफिकेट और टेंडर नियमों के उल्लंघन से जुड़े इस मामले में 20,000 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 10 April 2026, 10:54 AM IST
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Jaipur: राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को नई दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। सुबोध अग्रवाल पर जल जीवन मिशन में हुए कथित 20,000 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले में शामिल होने का आरोप है। जयपुर की एक अदालत द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने के बाद वे फरार चल रहे थे, जिसके बाद एसीबी की टीम ने दिल्ली में दबिश देकर उन्हें हिरासत में लिया।

फर्जी दस्तावेजों के जरिए हासिल किए करोड़ों के ठेके

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब जांच में सामने आया कि दो निजी कंपनियों ने पीएचईडी (PHED) के उच्च अधिकारियों के साथ मिलकर जाली दस्तावेजों के आधार पर टेंडर हासिल किए थे। इन कंपनियों ने इंडियन रेलवे कंस्ट्रक्शन इंटरनेशनल लिमिटेड (IRCON) से जारी फर्जी 'लेटर ऑफ अवॉर्ड' और 'कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र' अपने बिड दस्तावेजों के साथ लगाए थे। जब पीएचईडी के अतिरिक्त मुख्य अभियंता ने इन दस्तावेजों का सत्यापन करवाया, तो बेंगलुरु स्थित इरकॉन कार्यालय ने इन्हें पूरी तरह से फर्जी और जाली करार दिया। इस धोखाधड़ी के माध्यम से लगभग 960 करोड़ रुपये के टेंडर अवैध रूप से प्राप्त किए गए थे।

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टेंडर प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और गोपनीयता का उल्लंघन

एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता के अनुसार, सुबोध अग्रवाल ने पीएचईडी के अतिरिक्त मुख्य सचिव रहते हुए नियमों के विरुद्ध जाकर टेंडर प्रक्रिया में बदलाव किए थे। आरोप है कि उन्होंने 50 करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी परियोजनाओं के लिए 'साइट विजिट सर्टिफिकेट' की अनिवार्य शर्त जोड़ दी थी। यह कदम न केवल नियमों के खिलाफ था, बल्कि इससे उन कंपनियों की पहचान भी उजागर हो गई जो बोली लगा रही थीं, जबकि टेंडर प्रक्रिया में इसे पूरी तरह गोपनीय रखा जाना चाहिए था।

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सरकारी खजाने को पहुंचाई गई भारी आर्थिक क्षति

जांच में यह भी पाया गया है कि टेंडर की शर्तों में की गई इन अनियमितताओं के कारण पूरी प्रक्रिया दूषित हो गई, जिसके परिणामस्वरूप टेंडर की दरें सामान्य से 30 से 40 प्रतिशत तक अधिक रहीं। पहचान उजागर होने और मिलीभगत के कारण ऊंची दरों पर टेंडर स्वीकृत किए गए, जिससे सरकारी खजाने पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इन महंगे टेंडरों को मंजूरी दी गई, जो अब जांच के घेरे में हैं। इस गिरफ्तारी के बाद अब विभाग के कई अन्य बड़े अधिकारियों पर भी गाज गिरने की संभावना जताई जा रही है।

Location :  Jaipur

Published :  10 April 2026, 10:54 AM IST

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