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प्रतीकात्मर तस्वीर (Img- Internet)
Kolkata: पश्चिम बंगाल के सियासी अखाड़े में इस बार लेफ्ट फ्रंट अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की रणनीति के साथ चुनावी मैदान में उतर रहा है। वाम मोर्चे के चेयरमैन बिमान बोस ने बुधवार को कोलकाता में कहा कि चुनाव इस बार चुनौतीपूर्ण है, लेकिन इसे नई उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।
इस बार लेफ्ट मोर्चा अकेले नहीं बल्कि ISF और CPI (माले) लिबरेशन के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहा है। इस गठबंधन के तहत कुल 294 सीटों में से वाम मोर्चा खुद 252 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगा। नए सहयोगियों ISF को 30 सीटें और CPI (माले) लिबरेशन को 8 सीटें दी गई हैं।
वाम मोर्चे के कुनबे में सबसे बड़ी हिस्सेदारी सीपीएम (CPI-M) की है, जो 195 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। अन्य पार्टियों में ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक 23 सीटों पर चुनाव लड़ेगा, जबकि CPI और RSP को 16-16 सीटें दी गई हैं।
RCPI और मार्क्सवादी फॉरवर्ड ब्लॉक को 1-1 सीट मिली है। इसके अलावा एक सीट पश्चिम बंगाल सोशलिस्ट पार्टी और तीन सीटें अन्य लोकतांत्रिक और सामाजिक संगठनों के लिए छोड़ी गई हैं, जिन्हें वाम मोर्चा बाहर से समर्थन देगा।
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2021 के चुनाव में लेफ्ट फ्रंट का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा था। किसी भी सीट पर जीत नहीं मिली थी। वहीं, ISF सिर्फ एक सीट जीत पाई थी। बिमान बोस ने कहा कि मौजूदा माहौल में यह चुनाव उनके लिए बहुत मायने रखता है और यह गठबंधन लेफ्ट की राजनीतिक मजबूती बढ़ा सकता है।
पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव दो चरणों में होगा। पहले चरण की वोटिंग 23 अप्रैल और दूसरे चरण की 29 अप्रैल को होगी। वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी। इस दिन ही पता चलेगा कि नया गठबंधन कितना प्रभावशाली रहा और वाम मोर्चा अपनी खोई जमीन वापस पाने में सफल हुआ या नहीं।
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बिमान बोस ने मीडिया से कहा कि इस बार का चुनाव सिर्फ मुकाबला नहीं बल्कि नई उम्मीद की दिशा है। गठबंधन के जरिए वाम मोर्चा ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन मजबूत है और पूरी तैयारी के साथ चुनाव मैदान में उतर रहे हैं।
Location : Kolkata
Published : 2 April 2026, 10:54 AM IST