पीएम मोदी से लेकर हिमंत सरमा तक, असम चुनाव को लेकर संभाली कमान; कांग्रेस की रणनीति पर सबकी नजर

असम विधानसभा चुनाव की राजनीति अब और गर्म हो गई है। भाजपा ऊपरी असम की 40 सीटों पर खास ध्यान दे रही है और पीएम मोदी व हिमंत सरमा की सक्रियता को और रोचक बना दिया है। वहीं कांग्रेस भी पूरी ताकत झोंक रही है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 1 April 2026, 2:56 PM IST
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Dispur: असम विधानसभा चुनाव की सरगर्मी बढ़ती जा रही है और राजनीतिक पार्टियों ने प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा तीसरी बार सत्ता में वापसी के लिए कुल 126 सीटों में से खासतौर पर 40 ऊपरी असम की सीटों पर ज्यादा भरोसा कर रही है।

पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर हिमंत बिस्वा सरमा तक भाजपा की पूरी मशीनरी सक्रिय है। कांग्रेस भी गठबंधन के जरिए चुनौती देने के लिए पूरी तैयारी में है। लेकिन ऊपरी असम की 40 सीटें खेल का रुख बदल सकती हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने संभाली कमान

असम में प्रचार तेजी पकड़ चुका है। पीएम नरेंद्र मोदी चाय बागानों और विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच पहुंचे। उन्होंने स्थानीय मजदूरों और ग्रामीण समुदायों से संवाद किया। पार्टी का उद्देश्य हिमंत बिस्वा सरमा की लीडरशिप में सत्ता की वापसी को सुनिश्चित करना है।

2021 के आंकड़े बढ़ा रहे उम्मीदें

भाजपा को 40 ऊपरी असम की सीटों में 2021 में 35 पर जीत मिली थी, जबकि कांग्रेस महज 5 सीटों पर सफल रही। इस आंकड़े ने भाजपा के उत्साह को और बढ़ा दिया है। यह क्षेत्र पहचान की राजनीति के लिहाज से पार्टी के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

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बांग्लादेशी घुसपैठ और जमीन सुधार अभियान

भाजपा सरकार ने इस क्षेत्र में बांग्लादेशी घुसपैठियों को हटाने और अवैध कब्जे मुक्त करने के अभियान चलाए। दावा किया गया कि डेढ़ लाख बीघा जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया और 50 हजार लोगों को वोटर लिस्ट से हटाया गया। इन कदमों का असर चुनाव में भाजपा के पक्ष में देखा जा रहा है।

वोटर लिस्ट और संगठन में बदलाव

असम में बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट में सुधार किया गया है। इसके अलावा भाजपा ने संगठन में कई बड़े बदलाव किए हैं। टिकट बंटवारे में 19 पुराने विधायकों को मौका नहीं दिया गया और नए चेहरे उतारे गए हैं। इसका मकसद पुराने विधायकों के खिलाफ बने असंतोष को कम करना और पार्टी की ताजगी बनाए रखना है।

ऊपरी असम के प्रमुख जिले

भाजपा की रणनीति का केंद्र शिवसागर, जोरहाट, डिब्रूगढ़, धेमाजी, गोलाघाट, लखीमपुर, तिनसुकिया और बिस्वनाथ जिलों को बनाया गया है। यहां पार्टी पहचान और स्थानीय मुद्दों के जरिए मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है।

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कांग्रेस की रणनीति और गठबंधन

कांग्रेस ने इस बार अपनी तैयारी को मजबूत करने के लिए सीपीएम, सीपीआई, भाकपा-माले, असम जातीय परिषद और रायजोर दल के साथ गठबंधन किया है। पार्टी का उद्देश्य विभिन्न वर्गों और समुदायों को साधना है, ताकि भाजपा की पहचान राजनीति के प्रभाव को चुनौती दी जा सके।

भाजपा के ट्रंप कार्ड ‘असमिया पहचान’

भाजपा ने घोषणा पत्र और प्रचार अभियान के माध्यम से ‘असमिया पहचान’ को चुनावी मुद्दा बनाया है। इसके अलावा यूसीसी लागू करना और अन्य स्थानीय मसलों को उठाकर पार्टी ने अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। पार्टी का मानना है कि यह ट्रंप कार्ड ऊपरी असम की सीटों पर फिर से काम कर सकता है।

Location : 
  • Dispur

Published : 
  • 1 April 2026, 2:56 PM IST

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