बंगाल में बीजेपी के आते ही बदले श्राबंती चटर्जी के सुर, बोली मजबूरी में करती थी…

बंगाल में टीएमसी के शासन में कलाकार और आम जनता दोनों पर दबाव था। श्राबंती चटर्जी ने खुलासा किया कि सत्ता परिवर्तन के बाद उन्हें अब न्याय की उम्मीद है और टीएमसी के दबाव में की गई मजबूरी का सच सामने आया है।

Updated : 12 May 2026, 3:12 PM IST
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kolkata: बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद टॉलीवुड अभिनेत्री श्राबंती चटर्जी ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए टीएमसी (ममता बनर्जी) शासन के दौरान अपने अनुभवों का खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि कलाकार होने के नाते उन पर सत्ता पक्ष का दबाव रहता था और कई बार उन्हें अनिच्छा के बावजूद टीएमसी के कार्यक्रमों में शामिल होना पड़ता था।

कलाकारों पर रहता था दबाव

श्राबंती चटर्जी ने स्पष्ट किया कि बंगाल में कलाकारों पर राजनीतिक दबाव होना आम बात है। उन्होंने बताया कि टीएमसी के शासन में उन्हें कई बार ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेना पड़ता था, जिनमें वह स्वेच्छा से नहीं जाना चाहती थीं। इसके बावजूद इंडस्ट्री में बने रहने और काम करने के लिए कई बार समझौता करना पड़ता था।

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सत्ता परिवर्तन और अभया की उम्मीद

नयी भाजपा सरकार के गठन के बाद श्राबंती ने अपनी भावनाओं का खुलकर इजहार किया। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन की खबर सुनते ही सबसे पहले उनके दिमाग में ‘अभया’ की मां का चेहरा आया। एक मां होने के नाते वह चाहती हैं कि राज्य में ऐसी सरकार हो, जो महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करे और पीड़ितों को न्याय दिला सके। श्राबंती ने अभया के मामले में न्याय मिलने की उम्मीद जताई और कहा कि अगर यह परिवर्तन बंगाल की भलाई के लिए है, तो वे इसका पूरा समर्थन करेंगी।

पार्थ चटर्जी और 2021 का चुनाव अनुभव

श्राबंती ने 2021 के विधानसभा चुनाव का अपना कड़वा अनुभव भी साझा किया। भाजपा के टिकट पर बेहाला पश्चिम सीट से पार्थ चटर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ते हुए वह हार गई थीं। उन्होंने कहा कि जनता की राय तो स्पष्ट थी, लेकिन बाद में जब पार्थ चटर्जी के घर से नोटों के पहाड़ बरामद हुए और उनका भ्रष्टाचार सामने आया, तब उन्हें बहुत अफसोस हुआ। उन्होंने कहा कि काश लोग पहले समझ पाते।

श्राबंती ने यह भी बताया कि टीएमसी के लिए प्रचार करने के सवाल पर कलाकारों पर बहुत दबाव रहता है और इंडस्ट्री में काम करने के लिए कई बार समझौते करना पड़ता है।

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क्या फिर भाजपा से जुड़ेंगी श्राबंती?

श्राबंती के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या वह फिर से भाजपा में सक्रिय होंगी। उन्होंने कहा कि 2021 में शायद भाजपा को बंगाल को और गहराई से समझने की जरूरत थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। यह संकेत देता है कि नयी राजनीतिक परिस्थितियों में कलाकारों के कदम भी बदल सकते हैं।

Location :  kolkata

Published :  12 May 2026, 3:12 PM IST

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