“लद्दाख के साथ सौतेला व्यवहार क्यों?” सोनम वांगचुक ने केंद्र से मांगा जेल में काटे 6 महीने का जवाब

लेह हिंसा के एक साल होने पर सोनम वांगचुक ने केंद्र से जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और लद्दाख के मुद्दों पर जवाब मांगा। उन्होंने NEET मुआवजे, NSA के तहत गिरफ्तारियों और लंबे समय तक जेल में रहने वाले विचाराधीन कैदियों को लेकर भी सवाल उठाए।

Post Published By: Ramdev Gupta
Updated : 27 September 2026, 3:23 PM IST
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New Delhi: लेह हिंसा की पहली बरसी पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार और मीडिया की भूमिका को लेकर सवाल उठाए। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने लद्दाख के लोगों की मांगों, पिछले साल हुई हिंसा और न्यायिक जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया।

वांगचुक ने कहा कि लद्दाख हमेशा देश के साथ खड़ा रहा है। उनका कहना था कि सीमा क्षेत्र के लोगों ने बिना वर्दी और वेतन के भी देश की रक्षा में योगदान दिया है, लेकिन जब उन्हें अपनी आवाज देश तक पहुंचाने की जरूरत है तो उनकी बात पर्याप्त रूप से सामने नहीं आ रही।

उन्होंने मीडिया पर कथित नियंत्रण को लेकर सवाल करते हुए पूछा कि “मीडिया पर इतना कंट्रोल क्यों है, जैसे यह कोई तानाशाही देश हो।” यह बयान उन्होंने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया।

लेह हिंसा को लेकर सरकार से जवाब की मांग

वांगचुक ने 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा का जिक्र करते हुए सरकार से कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, उस घटना में चार लोगों की मौत हुई थी और बाद में केंद्र सरकार ने घटना की न्यायिक जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बीएस चौहान की अध्यक्षता में आयोग गठित किया था।

वांगचुक ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई में निहत्थे लोगों पर गोली चलाने से पहले पर्याप्त चेतावनी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि घटना में 80 से अधिक लोग घायल हुए और बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया। अलग-अलग रिपोर्टों में घायलों और गिरफ्तार लोगों की संख्या में अंतर दर्ज हुआ है।

जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

वांगचुक ने कहा कि लोगों की मांग पर सरकार ने जांच आयोग बनाया था, लेकिन एक साल बाद भी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। उन्होंने सरकार से जांच के निष्कर्ष जल्द साझा करने की मांग की। 24 सितंबर 2026 को लेह हिंसा के एक साल होने पर वांगचुक ने न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग दोहराई थी। इसी दौरान लद्दाख प्रशासन ने हिंसा से जुड़े 20 लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की घोषणा की थी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में वांगचुक ने अपने उस बयान पर भी बात की, जिसमें उन्होंने तिब्बत का जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने बयान के लिए माफी इसलिए मांगी, क्योंकि उससे उनके तिब्बती दोस्तों को ठेस पहुंची थी।

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सरकार ने क्या कहा था?

केंद्र सरकार ने सितंबर 2025 की हिंसा के बाद कानून-व्यवस्था की स्थिति को गंभीर बताते हुए सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया था। मार्च 2026 में केंद्र ने उनकी हिरासत तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी थी और कहा था कि सरकार लद्दाख के मुद्दों के समाधान के लिए बातचीत के लिए प्रतिबद्ध है।

NEET मामले में मुआवजे का मुद्दा भी उठाया

वांगचुक ने जुलाई में अपने अनशन के दौरान केंद्र से मिले आश्वासन का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रों से जुड़े NEET विवाद में जान गंवाने वाले विद्यार्थियों के परिवारों को मुआवजा देने की बात लिखित रूप में कही गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि दो महीने बीतने के बाद भी इस दिशा में क्या कार्रवाई हुई और मुआवजा अब तक क्यों नहीं दिया गया।

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NSA के तहत गिरफ्तारियों पर भी उठाया सवाल

वांगचुक ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किए गए लोगों को लेकर भी सरकार से जवाबदेही की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक जेल में रहता है और बाद में उसके खिलाफ अपराध साबित नहीं होता, तो उसके वर्षों के नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा।

उन्होंने अपने जोधपुर जेल में रहने के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने वहां ऐसे कई कैदियों को देखा, जिनके मामले अभी सिद्ध नहीं हुए थे। वांगचुक ने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करने की व्यवस्था बनानी चाहिए और दोषमुक्त होने वाले लोगों के नुकसान की भरपाई पर भी विचार होना चाहिए।

Location :  new Delhi

Published :  27 September 2026, 3:23 PM IST

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