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बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 27 सितंबर को बेतिया दौरे पर आ रहे हैं। इस कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता कर दी गई है और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
अमित शाह
Patna: बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी रणनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसी सिलसिले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 27 सितंबर को बेतिया पहुंचने वाले हैं। खास बात यह है कि एक महीने के भीतर शाह का यह दूसरा बिहार दौरा है, जिससे साफ है कि भाजपा राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।
अमित शाह के आगमन को लेकर बेतिया पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए मोर्चा संभाल लिया है। बुधवार देर रात पुलिस अधीक्षक डॉ. शौर्य सुमन ने सदर एसडीपीओ विवेक दीप के साथ कुमारबाग स्थित गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज का निरीक्षण किया। यही वह स्थान है जहां अमित शाह का कार्यक्रम प्रस्तावित है।
अमित शाह
निरीक्षण के दौरान एसपी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सुरक्षा में किसी भी स्तर पर कोई चूक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पार्किंग, वीआईपी मूवमेंट, आमजन की सुविधा और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष प्लानिंग करने को कहा। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर रियल टाइम मॉनिटरिंग और फील्ड टीम की लगातार समीक्षा भी सुनिश्चित की जा रही है।
बेतिया पुलिस ने कहा है कि कार्यक्रम के दिन पर्याप्त संख्या में सुरक्षाबल तैनात किए जाएंगे। ड्रोन कैमरों से निगरानी, सीसीटीवी की मदद से सुरक्षा का आकलन और जगह-जगह नाकाबंदी जैसे उपायों को अमल में लाया जाएगा। भीड़ नियंत्रण के लिए मल्टी लेयर बैरिकेडिंग की योजना है और आम लोगों के लिए वैकल्पिक रास्तों की भी व्यवस्था की जाएगी।
अभी तक भाजपा की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अमित शाह आमसभा को संबोधित करेंगे या केवल पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे। हालांकि राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि शाह इस दौरे में पार्टी की चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दे सकते हैं। यदि आमसभा होती है तो यह प्रदेश में भाजपा की ताकत का शक्ति प्रदर्शन भी होगा।
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यह अमित शाह का बिहार में एक महीने के अंदर दूसरा दौरा है, जिससे स्पष्ट होता है कि भाजपा राज्य में अपने संगठन को फिर से सक्रिय करने और सीटों की रणनीति को पुख्ता करने में जुटी है। इससे पहले उन्होंने पटना और गया में कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग की थी और अब पश्चिम चंपारण जैसे सीमावर्ती जिले का दौरा नई रणनीति की ओर इशारा करता है।
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