Parenting Tips: प्यार-प्यार में बच्चे को जिद्दी बना रही हैं आपकी ये 4 आदतें, आज से ही करें सुधार
क्या आपका 3-4 साल का बच्चा बात-बात पर जिद्दी हो रहा है? जानिए पैरेंट्स की वे 4 आदतें जो बच्चों को अनजाने में जिद्दी बना रही हैं। रोने पर मांग पूरी करना और रूटीन ना फॉलो करवाने जैसे आदतों को आज ही बदलें।
हर माता-पिता अपने बच्चों को स्वस्थ और खुशहाल माहौल देना चाहते हैं। वे बच्चों को प्यार से समझाना और सही बातें सिखाना पसंद करते हैं। हालांकि, कई बार इसी लाड़-प्यार के चक्कर में बच्चे अनजाने में जिद्दी और हठी स्वभाव के बन जाते हैं। शुरुआत में छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करने के कारण पैरेंट्स को इसका अंदाजा भी नहीं लग पाता। जब बच्चा 3 से 4 साल की उम्र में अपनी हर बात मनवाने के लिए जिद पर अड़ जाता है, तब पैरेंट्स को अपनी गलती का अहसास होता है। (Img- Pinterest)
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अक्सर जब 3-4 साल का बच्चा किसी चीज की डिमांड करता है और मना करने पर रोने लगता है, तो पैरेंट्स तुरंत पिघल जाते हैं। रोना देखकर बच्चे की मांग पूरी कर देना सबसे खतरनाक है। इससे बच्चे को यह समझ आ जाता है कि रोने, चिल्लाने और नखरे दिखाने से उसकी हर बात मान ली जाएगी। अगली बार वह अपनी बात मनवाने के लिए और ज्यादा रोएगा व टैंट्रम दिखाएगा। इसलिए बच्चे के रोने पर तुरंत उसकी हर मांग पूरी करने से बचें। (Img- Pinterest)
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बच्चे को बात-बात पर बहुत सारे विकल्प देना भी उसे जिद्दी बना सकता है। जैसे खाने के समय अगर बच्चा बनी हुई चीज खाने से मना करे, तो पैरेंट्स तुरंत दूसरा या तीसरा ऑप्शन देने लगते हैं। ऐसा करने से बच्चा यह सीख जाता है कि थोड़े से नखरे दिखाने पर उसे उसकी मनपसंद चीज आसानी से मिल जाएगी। नतीजतन, वह आपकी बात मानना बंद कर देता है और हर काम में अपनी पसंद के विकल्प तलाशने लगता है, जो आगे चलकर बड़ी समस्या बनता है। (Img- Pinterest)
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छोटे बच्चों के लिए सही रूटीन फॉलो ना करवाना उनके व्यवहार को प्रभावित करता है। जब नहाने, खाने, खेलने और सोने का समय तय नहीं होता, तो बच्चों को लगता है कि वे कभी भी कुछ भी कर सकते हैं। बच्चों के दिमाग को प्रिडिक्टिबिलिटी यानी अनुशासन और समय तालिका पसंद होती है। जब उन्हें पता होता है कि आगे क्या करना है, तो वे शांत रहते हैं। बिना रूटीन के बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं, इसलिए उनका दैनिक समय तय करना बेहद जरूरी है। (Img- Pinterest)
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बच्चे को एक ही काम के लिए बार-बार टोकना या इंस्ट्रक्शन देना बंद कर देना चाहिए। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, बार-बार एक ही बात बोलने से बच्चे का दिमाग यह मान लेता है कि उसे पहली बार में माता-पिता की बात सुनने की कोई जरूरत नहीं है। वह सोचता है कि जब मम्मी-पापा चिल्लाएंगे या गुस्सा करेंगे, तभी काम करना है। इसलिए बच्चे को एक ही बार में साफ और स्पष्ट निर्देश दें, ताकि वह पहली बार में ही बात सुनना और समझना सीखे। (Img- Pinterest)