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मोबाइल टावर से कैंसर या गंभीर बीमारी का डर लंबे समय से लोगों में था। भारत सरकार और WHO ने स्पष्ट किया है कि टावर से निकलने वाली रेडिएशन तय मानकों में है और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह नहीं। सुरक्षा नियमों का कड़ा पालन किया जाता है।


लोगों के मन में लंबे समय से सवाल है कि क्या मोबाइल टावरों से कैंसर हो सकता है। टावर लगते ही अफवाहें फैलती हैं कि ज्यादा रेडिएशन या पास रहने से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। इस डर को सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह चिंता बेबुनियाद है।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)



भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने सोशल मीडिया पर बताया कि मोबाइल टावर से निकलने वाली रेडिएशन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है। WHO और भारत सरकार दोनों ने यह स्पष्ट किया है कि तरंगें तय सुरक्षा मानकों के भीतर रहती हैं।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)



इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (EMF) प्राकृतिक रूप से हमारे आस-पास रहती है। मोबाइल फोन और टावर दोनों ही कम शक्ति पर काम करते हैं। टावर की रेडिएशन स्तर बेहद कम होती है और सुरक्षा मानक अंतरराष्ट्रीय ICNIRP गाइडलाइन्स से भी कड़े बनाए गए हैं।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)



भारत में मोबाइल टावरों की रेडिएशन सीमा WHO के मानक का केवल दसवां हिस्सा है। नियमों का पालन न करने पर टावर पर भारी जुर्माना या बंद करने का प्रावधान है। सुरक्षा के मामले में अतिरिक्त सावधानी बरती जाती है।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)



विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 25,000 से अधिक शोधों की समीक्षा के बाद कहा है कि मोबाइल टावर और वायरलेस नेटवर्क से स्वास्थ्य पर कोई ठोस नकारात्मक प्रभाव नहीं मिला है। 5G तकनीक के लिए भी कोई कैंसर या गंभीर बीमारी का प्रमाण नहीं है।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)
