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काशी का मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म में मोक्षदायनी घाट के रूप में प्रसिद्ध है। यहां लोग मनोकामना नहीं, बल्कि आत्मा की शांति और मुक्ति की कामना लेकर आते हैं। घाट की अखंड अग्नि और पौराणिक कथाएं इसे विशेष बनाती हैं।


काशी के मणिकर्णिका घाट को मोक्षदायनी घाट कहा जाता है। यहां लोग जीवन की इच्छाओं के लिए नहीं, बल्कि आत्मा की शांति और मुक्ति की कामना लेकर आते हैं।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)



धर्मग्रंथों के अनुसार, मणिकर्णिका घाट में मृत्यु होना मंगलकारी माना जाता है। यहां अंतिम संस्कार से आत्मा जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाती है।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)



घाट की अनोखी विशेषता यह है कि यहां की अग्नि कभी नहीं बुझती। इसे ‘अखंड अग्नि’ कहा जाता है, जो जीवन-मरण और समय की रहस्यमयी शक्ति को दर्शाती है।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)



मणिकर्णिका घाट का नाम देवी सती के कान की मणि गिरने से पड़ा। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां पार्वती का श्राप इस घाट को हमेशा चिताओं से जलता रहने के लिए प्रेरित करता है।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)



घाट पर नवीनीकरण कार्य के दौरान कुछ मूर्तियों और कलाकृतियों के हटाए जाने की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई। वीडियो को लेकर सियासी विवाद और फेक-या-एआई चर्चाएं भी शुरू हुई हैं।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)
