आज की डिजिटल लाइफ में बढ़ता डोपामिन बर्नआउट… जानिये क्यों सब कुछ होते हुए भी लगता है खालीपन?
आज की तेज डिजिटल लाइफ में डोपामिन बर्नआउट बढ़ रहा है, जिससे लोग सब कुछ होते हुए भी खालीपन महसूस करते हैं। सोशल मीडिया, नोटिफिकेशन और आसान रिवॉर्ड्स दिमाग का संतुलन बिगाड़ रहे हैं। इसका असर मोटिवेशन, खुशी और फोकस पर साफ दिख रहा है।
आज की तेज जिंदगी में कई लोग ऐसा महसूस कर रहे हैं कि सब कुछ होने के बावजूद अंदर खालीपन है। पहले छोटी-छोटी चीजें खुशी देती थीं, लेकिन अब वही चीजें असर नहीं करतीं। इस स्थिति को लोग डोपामिन बर्नआउट कह रहे हैं, हालांकि यह कोई आधिकारिक बीमारी नहीं है, पर इसका अनुभव वास्तविक माना जाता है।(फोटो सोर्स-इंटरनेट)
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डोपामिन को अक्सर फील गुड केमिकल कहा जाता है, लेकिन यह असल में खुशी से ज्यादा मोटिवेशन और उम्मीदों से जुड़ा होता है। यह हमें नई चीजें करने, सीखने और लगातार प्रयास करने के लिए प्रेरित करता है। जब दिमाग लगातार तेज उत्तेजनाओं में रहता है, तो इसकी संवेदनशीलता धीरे-धीरे कम होने लगती है।(फोटो सोर्स-इंटरनेट)
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आज के समय में सोशल मीडिया, छोटे वीडियो और लगातार नोटिफिकेशन दिमाग को तुरंत मिलने वाले रिवॉर्ड्स का आदी बना रहे हैं। पहले मेहनत के बाद खुशी मिलती थी, लेकिन अब बिना मेहनत तुरंत सब मिल जाता है। इससे दिमाग का संतुलन बिगड़ जाता है और सामान्य चीजें भी कम रोमांचक लगने लगती हैं।(फोटो सोर्स-इंटरनेट)
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लगातार तनाव और थकान भी डोपामिन सिस्टम को प्रभावित करते हैं। जब शरीर और दिमाग थका होता है तो वह सिर्फ जीवित रहने पर ध्यान देता है, खुशी महसूस करने पर नहीं। इसके साथ सोशल मीडिया पर दूसरों की परफेक्ट जिंदगी देखकर अपनी जिंदगी भी कम आकर्षक लगने लगती है और असंतोष बढ़ता है।(फोटो सोर्स-इंटरनेट)
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इसके संकेत धीरे-धीरे दिखते हैं जैसे पुरानी पसंदीदा चीजों में रुचि कम होना, मोटिवेशन घट जाना और बेचैनी महसूस होना। इससे बचने के लिए स्क्रीन टाइम कम करना, मेहनत वाली गतिविधियाँ करना, बोरियत को जगह देना और अच्छी नींद व नियमित शारीरिक गतिविधि अपनाना मददगार माना जाता है।(फोटो सोर्स-इंटरनेट)