Moradabad: मुरादाबाद से चौंकाने वाला मामला, युवक के पेट से निकलीं दर्जनों कीलें; एक्स-रे देख डॉक्टर भी दंग

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक युवक के पेट का जटिल ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने बड़ी संख्या में लोहे की कीलें बाहर निकाली हैं। युवक एक विशेष मानसिक स्थिति के कारण इस गंभीर संकट का शिकार हुआ, जिसके बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था।

Post Published By: Nitin Parashar
Updated : 31 March 2026, 1:36 PM IST
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Moradabad: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवक ने गुस्से में आकर लोहे की 78 कीलें निगल लीं। युवक की हालत बिगड़ने और पेट में असहनीय दर्द के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।

डॉक्टरों की एक विशेष टीम ने करीब पांच घंटे तक चले पेचीदा ऑपरेशन के बाद युवक के शरीर से एक-एक कर सभी कीलें सुरक्षित बाहर निकालीं। सात दिनों तक चले गहन उपचार के बाद अब युवक की हालत स्थिर बताई जा रही है।

एक्स-रे देखते ही दंग रह गए डॉक्टर

मूल रूप से रामपुर के रहने वाले इस युवक की जब अचानक तबीयत बिगड़ी और मुँह से खून आने लगा, तो परिजन उसे लेकर मुरादाबाद के जैम अस्पताल पहुंचे।

गैस्ट्रो सर्जन डॉ. मोहम्मद रियाज ने जब मरीज का एक्स-रे कराया, तो रिपोर्ट देखकर हर कोई दंग रह गया। युवक की आंतों और पेट के अंदरूनी हिस्सों में दर्जनों कीलें धंसी हुई थीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल सर्जरी का निर्णय लिया गया। एंडोस्कोपी और सी-आर्म इमेजिंग तकनीक की मदद से डॉक्टरों ने पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सभी 78 कीलों को शरीर से बाहर निकाल लिया।

क्या है 'इंटरमिटेंट एक्सप्लोसिव डिसऑर्डर'?

परिजनों के अनुसार, युवक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहा था और उसका इलाज चल रहा था। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. दिशांतर गोयल ने बताया कि युवक 'इंटरमिटेंट एक्सप्लोसिव डिसऑर्डर' (IED) नामक बीमारी से पीड़ित है। इस स्थिति में मरीज सामान्य समय में तो शांत रहता है, लेकिन छोटी सी बात पर अचानक उसे इतना तीव्र गुस्सा आता है कि वह अपना नियंत्रण खो देता है। इसी आवेश में आकर युवक ने घर में रखी कीलें निगल ली थीं।

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आवेग में उठाए गए कदम ने डाली जान जोखिम में

डॉक्टरों के मुताबिक, यह मामला मेडिकल साइंस के लिए भी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि कीलें आंतों को फाड़ सकती थीं, जिससे अंदरूनी संक्रमण (Sepsis) का खतरा था। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मरीजों को निरंतर निगरानी और काउंसलिंग की जरूरत होती है। फिलहाल, समय रहते सही इलाज मिलने से एक बड़ा हादसा टल गया और युवक को नई जिंदगी मिली है।

Location : 
  • Moradabad

Published : 
  • 31 March 2026, 1:36 PM IST

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