बिजली की रोशनी में सोना हो सकता है जानलेवा, हो सकती है कैंसर और दिल की बीमारी

आजकल शहरों में लोग देर रात तक मोबाइल, टीवी और तेज रोशनी में काम करते रहते हैं, जिससे शरीर की जैविक घड़ी गड़बड़ा रही है। नींद पूरी नहीं हो रही, तनाव बढ़ रहा है और मेलाटोनिन हार्मोन कम होने से दिल की बीमारी, डिप्रेशन और दूसरी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।

Updated : 28 April 2026, 9:26 AM IST
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New Delhi: डॉक्टरों का कहना है कि जैसे शरीर को धूप और उजाला चाहिए, वैसे ही अंधेरा भी बहुत जरूरी है। लेकिन आजकल की भागदौड़ वाली जिंदगी में लोग रात देर तक मोबाइल, टीवी और लैपटॉप की रोशनी में काम करते रहते हैं। धीरे-धीरे ये आदत शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है।

कृत्रिम रोशनी से बिगड़ रही बॉडी की नेचुरल घड़ी

चिकित्सकों के मुताबिक हमारे शरीर की एक प्राकृतिक घड़ी होती है, जो बताती है कब सोना है और कब जागना है। लेकिन जब हम रातभर तेज रोशनी में रहते हैं, तो ये घड़ी बिगड़ जाती है। इससे कई तरह की दिक्कतें शुरू हो जाती हैं, जैसे नींद न आना, थकान और मानसिक तनाव।

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बेडरूम में भी लाइट्स का चलन सही नहीं

आजकल लोग अपने बेडरूम को भी सजाने के लिए अलग-अलग तरह की लाइट्स लगाते हैं, लेकिन डॉक्टर कहते हैं कि सोते समय पूरा अंधेरा होना चाहिए। अगर बाहर से रोशनी आती है तो मोटे पर्दे लगाना बेहतर रहता है ताकि शरीर को पूरा आराम मिल सके।

डिजिटल गैजेट्स से दूरी जरूरी

डॉक्टरों की सलाह है कि सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल, टीवी और लैपटॉप बंद कर देना चाहिए। इससे दिमाग को आराम मिलता है और नींद अच्छी आती है।

दिल की बीमारियों का बढ़ता खतरा

हृदय रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर लोग रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक भी रोशनी में जागते रहते हैं, तो इससे दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। नींद पूरी न होने से तनाव बढ़ता है, जो दिल पर असर डालता है।

नींद का हार्मोन मेलाटोनिन हो रहा कम

मनोचिकित्सकों के मुताबिक अंधेरे में शरीर मेलाटोनिन नाम का हार्मोन बनाता है, जो अच्छी नींद के लिए जरूरी होता है। लेकिन रोशनी में रहने से ये हार्मोन कम बनता है, जिससे नींद खराब होती है और शरीर की लय बिगड़ जाती है।

डिप्रेशन और अनिद्रा के मामले बढ़े

डॉक्टरों का कहना है कि शहरों में अनिद्रा, बेचैनी और डिप्रेशन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह देर रात तक रोशनी में रहना और नींद की कमी है।

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कैंसर से लड़ने की क्षमता पर असर

विशेषज्ञ बताते हैं कि मेलाटोनिन कम होने से शरीर की रोगों से लड़ने की ताकत भी कमजोर हो जाती है। इससे कुछ मामलों में कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।

क्या करें सुधार के लिए

डॉक्टर सलाह देते हैं कि रात में मोबाइल और टीवी से दूरी बनाएं, कमरे को अंधेरा रखें और तय समय पर सोने की आदत डालें। इससे शरीर की प्राकृतिक घड़ी सही रहती है और बीमारियों का खतरा कम होता है।

Location :  New Delhi

Published :  28 April 2026, 9:24 AM IST

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