क्या भवानीपुर में ममता बनर्जी अपना गढ़ बचा पाएंगी या BJP करेगी बड़ा उलटफेर?

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में भवानीपुर सीट सबसे बड़ी सियासी जंग बन गई है, जहां ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी आमने-सामने हैं। बदले वोटर समीकरण, हटे नाम और BJP के आक्रामक अभियान ने इस सीट को TMC के लिए कठिन परीक्षा बना दिया है।

Updated : 28 April 2026, 9:18 AM IST
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Kolkata: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का दूसरा चरण 29 अप्रैल को होने जा रहा है, जिसमें 142 सीटों पर मतदान होगा। इस चरण में कई हाई-प्रोफाइल उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर है, लेकिन सबसे अधिक ध्यान दक्षिण कोलकाता की भवानीपुर सीट पर केंद्रित है। यह सीट मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के बीच प्रतिष्ठा की सीधी लड़ाई का केंद्र बन चुकी है।

ममता बनर्जी का गढ़ अब चुनौती के घेरे में

भवानीपुर को लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस (TMC) का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। 2011 से यह सीट ममता बनर्जी के राजनीतिक सफर का अहम आधार रही है। 2011 में TMC नेता सुब्रत बख्शी ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी और बाद में ममता के लिए इस्तीफा दिया था, जिसके बाद उपचुनाव में ममता ने 54,213 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की। 2016 में भी उन्होंने वाम-कांग्रेस गठबंधन को हराकर 25,301 वोटों से सीट बरकरार रखी।

हालांकि, उस समय भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस सीट पर मजबूत चुनौती पेश नहीं कर पाई थी। लेकिन 2021 के बाद राजनीतिक समीकरण बदल गए, जब BJP राज्य में मुख्य विपक्ष के रूप में उभरी।

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शुभेंदु अधिकारी की चुनौती

2026 के चुनाव में भवानीपुर सीट पर मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है, क्योंकि BJP ने अपने प्रमुख नेता शुभेंदु अधिकारी को यहां से मैदान में उतारा है। अधिकारी पहले TMC में थे और उनके पार्टी छोड़ने के बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया। 2021 में नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को अधिकारी से बेहद कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा था।

अब BJP उसी रणनीति को भवानीपुर में दोहराने की कोशिश कर रही है। अधिकारी के नेतृत्व में पार्टी ने यहां जोरदार प्रचार अभियान चलाया है, जिससे यह सीट अब सुरक्षित नहीं रह गई है।

“अगर हो सके, तो मुझे वोट देना”- ममता का बयान चर्चा में

चुनावी माहौल के बीच ममता बनर्जी का एक बयान काफी चर्चा में है। एक रैली के दौरान उन्होंने कहा, "अगर हो सके, तो मुझे ही वोट देना…" और अचानक मंच से उतर गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि पास में हो रही BJP की रैली के कारण उनके भाषण में बाधा आई।

उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ इसे सहानुभूति पाने की रणनीति मान रहे हैं, तो कुछ इसे उनकी चिंता का संकेत बता रहे हैं।

‘मिनी भारत’ क्यों है भवानीपुर?

भवानीपुर को ‘मिनी भारत’ कहा जाता है, क्योंकि यहां विविध समुदायों का मिश्रण देखने को मिलता है। इस विधानसभा क्षेत्र में कोलकाता नगर निगम के आठ वार्ड शामिल हैं। यहां बंगाली हिंदुओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में गैर-बंगाली समुदाय जैसे गुजराती, मारवाड़ी, पंजाबी और उड़िया भी रहते हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यहां के मतदाताओं में लगभग 42 प्रतिशत बंगाली हिंदू, 34 प्रतिशत गैर-बंगाली हिंदू और लगभग 24 प्रतिशत मुस्लिम हैं। इसके अलावा बिहार, ओडिशा और झारखंड से आए प्रवासी भी यहां बड़ी संख्या में मौजूद हैं।

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वोटर लिस्ट संशोधन ने बढ़ाई चिंता

हाल ही में वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) ने चुनाव को और पेचीदा बना दिया है। भवानीपुर में 47,000 से अधिक नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जिनमें से 40 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम मतदाताओं के बताए जा रहे हैं। इसके अलावा 14,000 अन्य नामों की जांच जारी है।

यह बदलाव TMC के लिए चिंता का कारण बन सकता है, क्योंकि मुस्लिम वोट बैंक पार्टी का अहम आधार माना जाता है।

प्रतिष्ठा की लड़ाई में क्या होगा परिणाम?

भवानीपुर सीट अब केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि ममता बनर्जी की राजनीतिक साख का प्रतीक बन गई है। जहां एक ओर TMC अपने गढ़ को बचाने में जुटी है, वहीं BJP इसे भेदने के लिए पूरी ताकत लगा रही है।

Location :  Kolkata

Published :  28 April 2026, 8:29 AM IST

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