पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर बड़ा अपडेट, जानियें क्या है चुनाव आयोग का प्लान

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद भी 500 सीएपीएफ कंपनियां तैनात रहेंगी। चुनाव आयोग ने यह कदम हिंसा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया है। पिछले चुनाव में हुई हिंसा और शिकायतों को देखते हुए यह फैसला लिया गया। बाकी कंपनियों को मतगणना केंद्र और ईवीएम सुरक्षा के लिए रखा जाएगा।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 4 April 2026, 10:51 AM IST
google-preferred

Kolkata: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद भी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की 500 कंपनियां तैनात रहेंगी। चुनाव आयोग ने यह फैसला राज्य में चुनावी हिंसा को रोकने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिया है। सुरक्षा बलों की यह तैनाती "चुनाव आयोग के अगले आदेश तक" जारी रहेगी।

कुल तैनाती और ड्यूटी

बंगाल में चुनाव ड्यूटी के लिए कुल 2,400 सीएपीएफ कंपनियां तैनात की गई हैं, जिनमें से 1,700 कंपनियां 29 अप्रैल को मतदान खत्म होने के बाद वापस चली जाएंगी। बाकी 500 कंपनियां नतीजों आने तक और चुनाव हिंसा रोकने के लिए बनाए रखी जाएंगी। इसके अलावा, 200 अन्य कंपनियों को ईवीएम स्ट्रांग-रूम और मतगणना केंद्रों की सुरक्षा के लिए रखा जाएगा। हर कंपनी में लगभग 80 से 100 जवान होते हैं।

चुनाव आयोग के निर्देश

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि चुनाव में नागरिकों को डर और धमकी से मुक्त मतदान का अधिकार मिले। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदान के दौरान हिंसा, दबाव, प्रलोभन, बूथ जैमिंग और सोर्स जैमिंग जैसी घटनाओं को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: बीजेपी ने जारी की दूसरी सूची, कौन बना हाई- प्रोफाइल उम्मीदवार?

पिछले चुनाव का अनुभव

साल 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद बंगाल में हिंसा के कई मामले सामने आए थे। NHRC की जांच के अनुसार, 2 मई से 20 जून 2021 के बीच 1,970 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें हत्या, यौन उत्पीड़न, गंभीर चोट, आगजनी और धमकियां शामिल थीं। इन आरोपियों में से केवल 1,345 को गिरफ्तार किया गया और अधिकांश मामलों में एफआईआर दर्ज नहीं हुई।

चुनाव के बाद सुरक्षा प्रक्रिया

चुनाव के बाद राज्य में किसी भी हिंसा के मामले में सेना की तैनाती “चुनाव अधिकारी के अगले आदेश तक” जारी रहेगी। जीतने वाली पार्टी को सरकार बनाने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय या चुनाव आयोग से लिखित अनुमति लेकर ही सुरक्षा बल हटाने होंगे।

बंगाल चुनाव से पहले बड़ा एक्शन: कई थानों के बदले अफसर, जानिए क्यों सख्त हुआ चुनाव आयोग?

अन्य सुरक्षा और प्रशासनिक कदम

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा चुनाव से पहले की गई 2,185 पुलिस कर्मियों की तैनाती का भी संज्ञान लिया। इसमें टीएमसी समर्थक भी शामिल थे। आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी सुरक्षा कर्मियों को सभी पार्टियों के बीच समान रूप से पुनर्वितरित किया जाए। इसके अलावा खंडाघोष विधानसभा क्षेत्र के जॉइंट बीडीओ और असिस्टेंट आरओ को सस्पेंड कर दिया गया क्योंकि वे खुले तौर पर टीएमसी के पक्ष में प्रचार कर रहे थे।

Location : 
  • Kolkata

Published : 
  • 4 April 2026, 10:51 AM IST

Advertisement