हिंदी
शुभेंदु अधिकारी(Source: Google)
New Delhi:पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज शुभेंदु अधिकारी एक ऐसा नाम बन चुके हैं, जो सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं। लेकिन इस राजनीतिक बदलाव के पीछे केवल विचारधारा का अंतर नहीं, बल्कि ममता बनर्जी की 'अतिवादी' सोच और कार्यशैली की एक लंबी दास्तान है।
राजनीतिक गलियारों में आज भी यूपीए (UPA) की उस कैबिनेट बैठक का जिक्र होता है, जब ममता बनर्जी एक मुद्दे पर हंगामा कर बाहर निकल गई थीं। तत्कालीन मंत्री की हैरानी पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपना चश्मा साफ करते हुए जो कहा, वह आज के हालातों पर सटीक बैठता है। उन्होंने कहा था, "यदि कोई खुद को रवींद्रनाथ ठाकुर से बेहतर कवि और दा विंची से बेहतर चित्रकार मानने लगे, तो उसके लिए दुनिया की हर बात एक समस्या बन जाती है।" जानकारों का मानना है कि ममता की यही सोच शुभेंदु जैसे कद्दावर नेताओं के अलगाव का कारण बनी।
शुभेंदु अधिकारी, जिनके पिता शिशिर अधिकारी कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे, ने वामपंथ के गढ़ रहे कोंताई और तमलुक में अपनी जमीन तैयार की। 2009 और 2014 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने माकपा के दिग्गजों को धूल चटाई। नंदीग्राम आंदोलन में उनकी भूमिका ने ही ममता बनर्जी को सत्ता की कुर्सी तक पहुंचाया था। उनकी संगठन क्षमता को देखते हुए ममता ने उन्हें जंगलमहल का प्रभार और परिवहन मंत्रालय सौंपा, लेकिन जल्द ही विश्वास की जगह असुरक्षा ने ले ली।
शुभेंदु के बढ़ते प्रभाव से आशंकित होकर टीएमसी में एक समानांतर संगठन खड़ा किया गया। ममता बनर्जी ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को राजनीति में आगे बढ़ाने के लिए शुभेंदु को दरकिनार करना शुरू कर दिया। शुभेंदु ने आरोप लगाया था कि वह नाम मात्र के मंत्री थे, जबकि मंत्रालय खुद मुख्यमंत्री चला रही थीं।
साल 2020 की दुर्गा पूजा के दौरान शुभेंदु के समर्थकों ने 'दादार अनुगामी' के पोस्टरों से शक्ति प्रदर्शन किया, जिसमें टीएमसी का झंडा गायब था। इसके जवाब में टीएमसी नेताओं ने उन्हें 'मीर जाफर' तक कह डाला। अपमान का यह घड़ा तब भरा जब 2021 के चुनाव से ठीक पहले उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया।
आज जब बंगाल की राजनीति नाजुक मोड़ पर है, ममता बनर्जी को आत्ममंथन की जरूरत है। क्या उनकी व्यक्तिगत जिद और अपनों को ही दरकिनार करने की नीति ने टीएमसी के साम्राज्य में दरार पैदा कर दी है? यह सवाल बंगाल की राजनीति के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Location : New Delhi
Published : 9 May 2026, 10:57 AM IST