Bengal Assembly Elections: दो चरणों में वोटिंग से क्या बदलेगी रणनीति? BJP ने बताया अपने लिए फायदेमंद, जानें वजह

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव इस बार दो चरणों में कराने के चुनाव आयोग के फैसले से सियासत गरमा गई है। BJP इसे अपने लिए फायदेमंद मान रही है, जबकि TMC का कहना है कि चरणों की संख्या से चुनाव नतीजों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 16 March 2026, 11:38 AM IST
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Kolkata: पश्चिम बंगाल में इस बार विधानसभा चुनाव केवल दो चरणों में कराने के फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। भारत निर्वाचन आयोग के इस निर्णय पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे अपने लिए संभावित रूप से लाभकारी बताया है।

पिछले विधानसभा चुनाव 2021 में राज्य में आठ चरणों में मतदान कराया गया था, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव भी छह चरणों में हुए थे। इस बार कम चरणों में चुनाव कराने के फैसले ने चुनावी रणनीतियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

भाजपा को क्यों दिख रहा फायदा?

भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि कम चरणों में मतदान होने से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कैडर की एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में आवाजाही सीमित हो जाएगी। पार्टी का तर्क है कि अधिक चरणों में चुनाव होने पर टीएमसी अपने संगठनात्मक नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए अलग-अलग इलाकों में रणनीतिक रूप से ताकत झोंकती है।

भाजपा का मानना है कि दो चरणों में मतदान होने से यह रणनीति सीमित हो सकती है और मुकाबला अधिक संतुलित रहेगा।

प्रचार रणनीति को मिलेगा समय

भाजपा नेताओं को यह भी उम्मीद है कि पड़ोसी राज्य असम में 9 अप्रैल तक चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद वहां के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और पार्टी का संगठन बंगाल में प्रचार के लिए अधिक समय दे सकेगा।

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इसके अलावा कम चरणों में चुनाव होने से केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती और प्रबंधन भी आसान हो जाएगा। पार्टी को उम्मीदवारों के चयन और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए भी पर्याप्त समय मिलने की उम्मीद है।

दक्षिण बंगाल पर फोकस करेगी भाजपा

भाजपा के अंदर यह भी चर्चा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस बार दक्षिण बंगाल में अधिक समय देकर चुनाव प्रचार कर सकते हैं। दक्षिण बंगाल को भाजपा का अपेक्षाकृत कमजोर क्षेत्र माना जाता है, इसलिए पार्टी यहां अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटी है।

पार्टी नेताओं का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व की सक्रियता से इन क्षेत्रों में चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।

पहले चरण में भाजपा के मजबूत इलाके

चुनाव कार्यक्रम के अनुसार पहला चरण 23 अप्रैल को होगा। इसमें उत्तर बंगाल, जंगलमहल और पूर्वी मिदनापुर जैसे इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है।

विशेष रूप से पूर्वी मिदनापुर में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी का प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है, जो पार्टी के लिए चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

दूसरे चरण में कठिन चुनौती

दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा, जहां भाजपा अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है। ऐसे में पार्टी के शीर्ष नेता और संगठन पूरी ताकत के साथ इन इलाकों में प्रचार करने की योजना बना रहे हैं। भाजपा को उम्मीद है कि सीमित चरणों में होने वाले चुनाव से उसकी रणनीति को मजबूती मिलेगी।

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इन चुनावों के नतीजे 4 मई को पश्चिम बंगाल के साथ-साथ असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी एक साथ घोषित किए जाएंगे।

टीएमसी ने जताया जीत का भरोसा

दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेताओं का कहना है कि चुनाव दो चरणों में हों या आठ चरणों में, इससे अंतिम नतीजों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

राज्य की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने दावा किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगी। उनका कहना है कि बंगाल की जनता पूरी तरह से ममता बनर्जी के साथ खड़ी है और इस बार भी तृणमूल कांग्रेस की जीत तय है।

Location : 
  • Kolkata

Published : 
  • 16 March 2026, 11:38 AM IST

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